गोरखपुर। गोरखपुर जिले की चिल्लूपार विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने अस्मिता चंद को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। मायावती के निर्देश पर यह घोषणा हुई है। अस्मिता चंद इससे पहले भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुकी हैं और टिकट न मिलने की आशंका के चलते 22 साल पुराना भाजपा का साथ छोड़कर बसपा में शामिल हुईं। वे राजपूत (ठाकुर) समुदाय से हैं और उनके ससुर राजनारायण चंद ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। ससुर के बड़े भाई मारकंडे चंद तत्कालीन धुरियापार सीट से चार बार विधायक और मंत्री रहे हैं, जबकि उनके जेठ सीपी चंद भाजपा से एमएलसी हैं।
हम आपको बता दें कि, चिल्लूपार सीट लंबे समय से स्वर्गीय हरिशंकर तिवारी की पारंपरिक सीट रही है। यह सीट 1976 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। हरिशंकर तिवारी ने 1985 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की और 1985 से 2007 तक लगातार छह बार विधायक रहे तथा प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने। 2007 और 2012 के चुनावों में उन्हें बसपा प्रत्याशी राजेश त्रिपाठी ने हराया। 2017 में उनके बेटे विनय शंकर तिवारी बसपा के टिकट पर विधायक बने। बाद में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए, लेकिन 2022 में भाजपा के टिकट पर लड़े राजेश त्रिपाठी ने उन्हें हरा दिया। वर्तमान में राजेश त्रिपाठी भाजपा से विधायक हैं। 2027 के चुनाव में विनय शंकर तिवारी का सपा से चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा से अष्टभुजा शुक्ला भी टिकट की रेस में हैं। वे तेलंगाना के राज्यपाल और भाजपा नेता शिव प्रताप शुक्ला के भतीजे हैं और हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर चुके हैं।
वही यह भी बताते चले कि, चिल्लूपार विधानसभा सीट पारंपरिक रूप से ब्राह्मण बहुल मानी जाती है। यहां लगभग एक लाख ब्राह्मण, 90 हजार दलित और परिसीमन के बाद धुरियापार क्षेत्र शामिल होने से करीब 20-25 हजार ठाकुर मतदाता हैं। दलित और ब्राह्मण वोट बैंक इस सीट का मुख्य समीकरण रहे हैं। बसपा ने अस्मिता चंद के रूप में ठाकुर चेहरा उतारकर ठाकुर-दलित समीकरण पर बाजी पलटने की रणनीति बनाई है। भाजपा और सपा से ब्राह्मण प्रत्याशी का उतरना लगभग तय माना जा रहा है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
आखिर में जानकारी देते चले कि, 1980 के दशक में गोरखपुर में हरिशंकर तिवारी (ब्राह्मण गुट) और वीरेंद्र प्रताप शाही (ठाकुर गुट) के बीच वर्चस्व की अदावत शुरू हुई थी। तिवारी हाता पूर्वी उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों का शक्ति-पीठ बन गया, जबकि गोरखनाथ पीठ को ठाकुर वर्चस्व का केंद्र माना जाता रहा। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं और हरिशंकर तिवारी परिवार से पीठ की पुरानी सियासी अदावत जानी जाती है। सपा ने तिवारी हाता तथा उनके बेटों पर हुई प्रशासनिक व जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों को प्रतिशोध की राजनीति से जोड़ा है।
