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नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (GST) में सुधार लागू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस ने तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस का कहना है कि आठ वर्षों में जनता से 55 लाख करोड़ रुपये वसूलने के बाद अब सरकार 2.5 लाख करोड़ के ‘बचत उत्सव’ की बात कर रही है, जो गहरे घाव पर बैंड-एड लगाने जैसा है।

कांग्रेस ने जीएसटी सुधारों के लागू होने से पहले पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की आलोचना की है। मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तंज कसते हुए माफी की मांग की। जयराम रमेश ने कहा कि जीएसटी में सुधारों का कदम जीएसटी काउंसिल ने लिया है लेकिन प्रधानमंत्री ने इसका श्रेय खुद लेने की कोशिश की।

कांग्रेस ने जीएसटी सुधारों के लागू होने की पूर्व संध्या पर पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आठ साल में 55 लाख करोड़ रूपए वसूलने का घाव देने के बाद सुधारों का यह कदम उठाया गया है।

खरगे का हमला – “माफी मांगे सरकार”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी पर तीखा वार करते हुए कहा कि सरकार ने 2017 में कांग्रेस द्वारा सुझाए गए सरल और कुशल जीएसटी की जगह ‘गब्बर सिंह टैक्स’ लगाया, जिसके चलते आम जनता को लगातार महंगाई और टैक्स के बोझ का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस की आपत्तियाँ – “अधूरी है यह सुधार प्रक्रिया”

कांग्रेस नेताओं ने जीएसटी सुधारों को अपर्याप्त करार दिया और कहा कि इसमें अभी भी कई लंबित मुद्दों का समाधान नहीं हुआ है।

  1. एमएसएमई सेक्टर – जो रोजगार सृजन का सबसे बड़ा स्रोत है, उसकी चिंताओं का सार्थक समाधान नहीं किया गया।
  2. अंतरराज्यीय आपूर्ति – इस पर लागू सीमाओं को और बढ़ाने की आवश्यकता है।
  3. विभिन्न सेक्टरों की समस्याएँ – वस्त्र उद्योग, पर्यटन, निर्यातक, हस्तशिल्प और कृषि इनपुट को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
  4. राज्यों का मुआवजा – कांग्रेस का कहना है कि राज्यों के राजस्व हित सुरक्षित रखने के लिए मुआवजा अवधि को और 5 साल बढ़ाया जाना चाहिए था।

बता दें कि, कांग्रेस ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह मौजूदा जीएसटी व्यवस्था को आम जनता के खिलाफ मानती है। पार्टी ने सरकार से जनता से माफी मांगने की मांग की है और कहा है कि 8 साल तक अत्यधिक वसूली के बाद मामूली राहत का दिखावा करना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।

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