दिल्ली। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ जम्मू-कश्मीर के नेताओं की बैठक में अनुशासन भंग करने वाले नेताओं को सख्त चेतावनी दी गई। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल को अनुशासनहीनता पर सख्त फटकार लगाई गई, जबकि ताराचंद को पार्टी गतिविधियों में निष्क्रियता के लिए लताड़ मिली।
जानकारी देते चले कि, बैठक की अध्यक्षता पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने की। इसमें जम्मू-कश्मीर प्रभारी नासिर हुसैन, सह प्रभारी प्रगट सिंह, प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद करा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल, राष्ट्रीय महासचिव गुलाम अहमद मीर, ताराचंद और रमन भल्ला शामिल हुए। बैठक में पार्टी संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने, राज्य के दर्जे की बहाली के आंदोलन और अनुशासन पर चर्चा हुई।
एकजुटता का संदेश देने की कोशिश
कांग्रेस हाईकमान ने बैठक के माध्यम से यह संकेत देने का प्रयास किया कि पार्टी आंतरिक मतभेदों से ऊपर उठकर संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक मुद्दों पर फोकस करना चाहती है। नेतृत्व ने सभी नेताओं से आपसी समन्वय बनाए रखने और सार्वजनिक रूप से पार्टी की छवि को मजबूत करने की अपील की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में कांग्रेस अपने संगठन को पुनर्जीवित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में अनुशासन और सक्रियता को लेकर हाईकमान का सख्त रुख इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
चलते चलते बताते चले कि, दिल्ली में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस हाईकमान संगठनात्मक अनुशासन और सक्रियता के मुद्दे पर किसी प्रकार की ढिलाई के पक्ष में नहीं है। विकार रसूल को अनुशासन के संबंध में चेतावनी और ताराचंद को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की सलाह इसी संदेश का हिस्सा मानी जा रही है। साथ ही राज्य का दर्जा बहाली आंदोलन और संगठन विस्तार को लेकर पार्टी ने आगामी दिनों के लिए अपनी प्राथमिकताएं भी स्पष्ट कर दी हैं। अब देखना होगा कि इन निर्देशों का जम्मू-कश्मीर कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक ढांचे पर कितना प्रभाव पड़ता है।
