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समाचार मिर्ची

दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से करोड़ों रुपये मिलने की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है। ये पूरा मामला सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का फैसला किया तो उधर इलाहाबाद बार एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह जगह कोई कुड़ादान नहीं है।

इस पूरे मामले का कैसे हुआ पर्दाफाश?

दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी घर में अचानक आग लग गई। जिस वक्त आग लगी थी उस समय वर्मा घर पर नहीं थे। सूचना मिलने के बाद जैसे ही फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने के लिए वहां पहुंची उन्हें एक कमरे में नोटों का ढेर मिला। इस बेहद चौंकाने वाली घटना के बाद हर तरफ बस इसी घटना की चर्चा है। आग तो बूझ गई लेकिन इस खुलासे आग अब जंगल की आग की तरह फैल रही हैं। वहीं इस खुलासे के बाद जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर की सिफारिश की गई और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का फैसला लिया। वहीं उनके खिलाफ जांच भी शुरू कर दी गई है।

आखिरकार कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?

जस्टिस वर्मा की पैदाइश उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुई। उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से बी.कॉम ऑनर्स और मध्यप्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी किया।

साल 1992 में वकालत शुरू की।
वहीं 2006 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्पेशल एडवोकेट बने।
2012-2013 तक उत्तर प्रदेश के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल रहे।
2013 में सीनियर एडवोकेट बने और 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडिशनल जज नियुक्त हुए।
2016 में परमानेंट जज बने और 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज बने।

कई महत्वपूर्ण फैसले उनके नाम

आप नेता सत्येंद्र जैन के खिलाफ चल रही जांच को बंद करने का आदेश दिया था।
दिल्ली शराब नीति घोटाले में CBI और ED को जांच से संबंधित प्रेस विज्ञप्तियां जारी करने का निर्देश दिया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर पर विवाद

जस्टिस वर्मा के इलाहाबाद ट्रांसफर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ा ऐतराज जताया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा:

“अगर किसी आम नागरिक के घर से 15 लाख रुपये मिलते हैं, तो उसे जेल भेज दिया जाता है। लेकिन एक जज के घर से 15 करोड़ रुपये बरामद होते हैं और उन्हें घर वापसी दी जा रही है। क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट ‘कूड़ेदान’ है?”

बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया, तो वकील न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे। इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया गया है।

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