दिल्ली । दिल्ली की सड़कों पर सोशल मीडिया की रीलों का नशा कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका सबसे दर्दनाक उदाहरण सामने आया है द्वारका से। यहां 3 फरवरी 2026 को एक भीषण सड़क हादसे में 23 वर्षीय युवक साहिल धनेशरा की मौत हो गई। आरोप है कि हादसे का मुख्य कारण एक नाबालिग चालक द्वारा तेज रफ्तार में स्कॉर्पियो एसयूवी चलाना था, जो अपनी बहन के साथ ‘स्पीड फन रील’ बनाने में व्यस्त था। अब इस हादसे से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है, जो स्कॉर्पियो के अंदर से शूट किया गया था। इस वीडियो ने हादसे की भयावहता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है तथा समाज में रील बनाने की होड़ के खतरों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इस कड़ी मे बता दें कि, यह हादसा द्वारका साउथ थाना क्षेत्र में लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के पास सुबह 11:57 बजे हुआ। पुलिस के अनुसार, मौके पर स्कॉर्पियो (नंबर UP-57 BM-3057), एक स्विफ्ट डिजायर टैक्सी और साहिल की मोटरसाइकिल (DL-13 SW-7426) के बीच जोरदार टक्कर हुई। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर टैक्सी से टकराई और फिर टैक्सी बस से जा भिड़ी। साहिल मौके पर ही अपनी जान गंवा बैठे, जबकि टैक्सी ड्राइवर अजीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।
वही यह भी बताते चले कि, हादसे के बाद सामने आया सबसे चौंकाने वाला तथ्य एक वीडियो है, जो दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो के अंदर से ही रिकॉर्ड किया गया था। इस वीडियो में नाबालिग चालक तेज गति से गाड़ी दौड़ाता दिख रहा है। सड़क पर कोई डिवाइडर नहीं था और गाड़ी की रफ्तार इतनी अधिक थी कि वह एक बस से बाल-बाल बचती नजर आ रही है। सामने की सीट पर बैठी एक लड़की पर्स हाथ में लिए वीडियो बना रही है। बताया जा रहा है कि यह लड़की आरोपी नाबालिग की बहन है। वीडियो में साफ तौर पर तेज रफ्तार और लापरवाही दिखाई दे रही है, हालांकि दुर्घटना के ठीक क्षण की रफ्तार का सटीक आकलन नहीं हो पाया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हादसे की जांच में महत्वपूर्ण सबूत बन गया है।
गौरतलब हैं कि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हादसे की क्रूरता को और उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, साहिल की मौत क्रेनियो-सेरेब्रल इंजरी के कारण हुए हेमरेजिक शॉक से हुई। सिर के बाईं ओर खोपड़ी में फ्रैक्चर था, स्कैल्प के नीचे खून का थक्का (सबस्कैल्प हेमेटोमा) पाया गया। दिमाग में बड़े स्तर पर सबड्यूरल हेमेटोमा, खून के थक्के और सूजन दर्ज की गई। फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था, दोनों फेफड़ों की झिल्लियों में करीब 100 मिलीलीटर खून भरा हुआ मिला। बाईं ओर की चौथी, पांचवीं और छठी पसलियां टूटी हुई थीं। मुंह के अंदर भी खून के थक्के थे। शरीर के अन्य हिस्सों जैसे दाहिने हाथ और छाती पर भी कई गंभीर चोटें थीं। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि ये सभी चोटें उच्च गति वाले सड़क हादसे के अनुरूप हैं। अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज) और आंतरिक चोटों ने साहिल को बचने का कोई मौका नहीं दिया।
वही, साहिल की मौत ने एक मां का संसार उजाड़ दिया है। उनकी मां बार-बार कह रही हैं कि एम्बुलेंस मौके पर थी, लेकिन अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई और उनका बेटा लहूलुहान पड़ा रहा। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि रील का नशा कितना घातक हो सकता है। न्याय की उम्मीद में इन्ना माकन की आवाज गूंज रही है – क्या साहिल को इंसाफ मिलेगा?
