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नई दिल्ली। इस वर्ष होली के पर्व में होलिका दहन और रंग खेलने की तिथियों में अंतर देखने को मिल रहा है। होलिका दहन 2 मार्च को होगा, जबकि रंग वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। आमतौर पर होलिका दहन के अगले दिन रंग खेला जाता है, लेकिन इस बार भद्रा और चंद्रग्रहण के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। ज्योतिर्विदों के अनुसार, धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु ग्रंथों में भद्रा के चौथे चरण में होलिका दहन की अनुमति है, जो 2 मार्च की रात 12:50 बजे शुरू होगा। इसलिए होलिका दहन इसी दिन रात में किया जाएगा।

पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:18 बजे शुरू होकर 3 मार्च को शाम 4:33 बजे तक रहेगी। होलिका दहन रात्रि में किया जाता है, लेकिन 3 मार्च को पूर्ण चंद्रग्रहण लगेगा, जो शाम 5:59 बजे से 6:47 बजे तक रहेगा और भारत में दृश्यमान होगा। चंद्रग्रहण के कारण 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें रंग खेलना, मूर्ति स्पर्श, भोजन, शयन और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसलिए 3 मार्च को रंग खेलना संभव नहीं है।इस वजह से रंग वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी। सूतक काल में पूजा, ध्यान और जप पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह स्थिति कम ही देखने को मिलती है, लेकिन पंचांग और ज्योतिषीय नियमों के अनुसार यही उचित है।

क्यों बदली होली की तिथियां?

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन धुलंडी या रंगवाली होली मनाई जाती है। लेकिन इस वर्ष पूर्णिमा तिथि के दौरान भद्रा काल और चंद्रग्रहण का प्रभाव पड़ रहा है, जिसके चलते पारंपरिक क्रम में बदलाव किया गया है।

ज्योतिर्विदों का कहना है कि भद्रा काल में किसी भी शुभ कार्य को करना वर्जित माना जाता है। विशेष रूप से होलिका दहन जैसे धार्मिक अनुष्ठान भद्रा में नहीं किए जाते। हालांकि धर्मशास्त्रों में इसका अपवाद भी बताया गया है।

इस साल होलिका दहन की तिथि और होली खेलने के दिन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को होलिका दहन की बात कही जा रही है। वहीं, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है।इन संशयों को दूर करते हुए ज्योतिष आचार्य पंडित सुरेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि शास्त्र सम्मत रूप से 2 मार्च की मध्यरात्रि का समय होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ रहेगा।पंडित सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि 2 मार्च की संध्या बेला में भद्रा काल का प्रभाव रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है, इसलिए सूर्यास्त के तुरंत बाद दहन करना उचित नहीं होगा।भद्रा समाप्त होने के पश्चात रात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। इस मुहूर्त में विधि-विधान से पूजन और दहन करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।

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