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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया भर से प्रतिनिधिमंडल पहुंचे। भारत के केंद्रीय मंत्री, चीन के विशेष दूत, रूस के वरिष्ठ प्रतिनिधि, तुर्की के उपराष्ट्रपति और पाकिस्तान का पूरा प्रतिनिधित्व मौजूद रहा। मध्य एशिया के कई देशों ने भी शिरकत की। लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत ने कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा।

बता दें कि, ये तीनों देश मुस्लिम बहुल हैं और खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सदस्य इन देशों ने खामेनेई के जनाजे में अपनी अनुपस्थिति दर्ज कराई। GCC की स्थापना 1981 में ईरान के बढ़ते प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से हुई थी। GCC के अधिकांश देश सुन्नी बहुल हैं जबकि ईरान शिया बहुल है।UAE और ईरान के बीच अबू मूसा तथा टुंब द्वीपों को लेकर क्षेत्रीय विवाद है। बहरीन शिया बहुल आबादी वाला देश है लेकिन सुन्नी राजशाही के शासन में ईरान पर आंतरिक हस्तक्षेप का आरोप लगाता रहा है। कुवैत ने भी ईरान के साथ सावधानीपूर्ण दूरी बनाए रखी है।

गौरतलब हैं कि, हाल के ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध में ईरान ने GCC देशों पर शाहेद ड्रोनों से हमले किए थे। UAE, बहरीन और कुवैत सबसे अधिक प्रभावित हुए। इन देशों ने ईरान के हमलों के खिलाफ अपनी नाराजगी जताते हुए जनाजे में भाग नहीं लिया। सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अपने प्रतिनिधि भेजे थे।

अंतिम संस्कार में कई देशों की मौजूदगी

तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार में विभिन्न देशों के सरकारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भाग लिया। भारत की ओर से केंद्रीय स्तर का प्रतिनिधित्व रहा, जबकि चीन, रूस और तुर्किये ने भी अपने प्रतिनिधि भेजे। पाकिस्तान सहित मध्य एशिया और अन्य देशों के प्रतिनिधिमंडल भी समारोह में शामिल हुए। ईरान ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण राजनयिक कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत किया था।

क्या है GCC और ईरान का इतिहास?

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की स्थापना वर्ष 1981 में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान ने मिलकर की थी। संगठन का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था। इसकी स्थापना ऐसे समय हुई थी जब क्षेत्र में ईरानी क्रांति के बाद नई राजनीतिक परिस्थितियां बन रही थीं।

विश्लेषकों के अनुसार GCC के अधिकांश सदस्य देश सुन्नी बहुल हैं, जबकि ईरान शिया बहुल देश है। धार्मिक अंतर के अलावा क्षेत्रीय प्रभाव, सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर भी समय-समय पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद देखने को मिले हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ देशों ने ईरान के साथ संवाद और संबंध सुधारने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में विभिन्न देशों की उपस्थिति और कुछ देशों की अनुपस्थिति ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया की राजनीति केवल धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि सुरक्षा, क्षेत्रीय हितों, आर्थिक संबंधों और कूटनीतिक रणनीतियों से भी प्रभावित होती है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान और GCC देशों के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार और सुरक्षा से जुड़े साझा हित भविष्य में दोनों पक्षों के संबंधों को प्रभावित करते रहेंगे, जबकि कूटनीतिक स्तर पर संवाद बनाए रखना पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा।

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