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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली।लीची की खेती करने वाले किसानों के लिए गर्मियों में बाजार में इस फल की अच्छी मांग रहती है। लेकिन पेड़ों में फल कम लगना और उनकी गुणवत्ता कम होना एक बड़ी चुनौती है। अच्छा मुनाफा कमाने के लिए सही पोषण जरूरी है। महंगे केमिकल उर्वरकों की बजाय देसी और ऑर्गेनिक खादों से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

लीची के पेड़ों के लिए नीम की खली और सरसों की खली का मिश्रण सबसे अच्छा देसी नुस्खा बताया गया है। नीम की खली जड़ों के कीड़ों और फंगस को नियंत्रित करती है जिससे पेड़ मजबूत होते हैं। सरसों की खली में नाइट्रोजन और फास्फोरस भरपूर मात्रा में होता है जो पेड़ों की वृद्धि बढ़ाता है। इन दोनों को मिलाकर पेड़ों के चारों ओर रिंग बनाकर जड़ों में डालने से फलों की संख्या बढ़ती है, छिलका फटने से बचता है और फल चमकदार बनते हैं जिससे मंडी में अच्छा भाव मिलता है।

साथ ही अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट का उपयोग करें। कच्ची गोबर खाद दीमक पैदा कर सकती है। ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ाती है जो लीची के लिए जरूरी है। मानसून के बाद या फूल आने से पहले पेड़ों की गुड़ाई कर खाद डालने से मिट्टी भुरभुरी रहती है और जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचता है।

किसान गुड़, बेसन और गौमूत्र से बने वेस्ट डीकंपोजर जैसे लिक्विड फर्टिलाइजर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे सिंचाई के पानी में मिलाकर देने से सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं और पोषक तत्व जड़ों तक पहुंचते हैं। फल बनने के दौरान नमी की कमी न होने दें।

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