नई दिल्ली। तेज धूप, सूखी जमीन और पानी की कमी का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में ज्यादा पानी वाली फसलों पर निर्भर किसानों को सबसे अधिक चिंता हो रही है। कई किसान अब सूखे मौसम में भी आसानी से टिकने वाली फसलों और पेड़ों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।
कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाले सहजन, नींबू, अनार और अमरूद जैसे पेड़ किसानों की पहली पसंद बन रहे हैं। इन पेड़ों को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। एक बार लग जाने के बाद ये लंबे समय तक फल देते रहते हैं। बाजार में इनकी मांग बनी रहने से किसानों को अच्छी कमाई होती है। सूखे इलाकों में भी ये आसानी से उगाए जा सकते हैं। कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि इसमें पानी की बचत के साथ मुनाफा भी ज्यादा मिलता है।
बदलते मौसम में कम पानी वाली खेती किसानों के लिए मजबूत सहारा बन रही है। ऐसे पेड़ और फसलें सूखे में टिकने के साथ लंबे समय तक कमाई का स्रोत भी बनते हैं। कई किसान इससे बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं। पानी की समस्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए सही फसल और तकनीक चुनना जरूरी हो गया है।
कम पानी वाली खेती क्यों बन रही जरूरत
पिछले कुछ वर्षों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदला है। कई क्षेत्रों में मानसून सामान्य से कम रहा, जबकि कई इलाकों में लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी रही। इससे सिंचाई के पारंपरिक स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है। भूजल स्तर नीचे जाने से किसानों की लागत भी बढ़ रही है, क्योंकि अधिक पानी निकालने के लिए ज्यादा बिजली और संसाधनों की जरूरत पड़ती है।
ऐसी परिस्थितियों में कम पानी वाली खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प के रूप में उभर रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि किसान स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार फसल चयन करें, तो कम संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।
देश के कई ग्रामीण इलाकों में किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी आधारित खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। फलदार पेड़ों की खेती से किसानों को लंबे समय तक स्थिर आय प्राप्त होती है और बाजार में मांग बनी रहने के कारण जोखिम भी कम रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार तक पहुंच और उचित प्रशिक्षण मिले, तो कम पानी वाली खेती देश की कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत और टिकाऊ बना सकती है।
वर्तमान परिस्थितियों में बदलते मौसम और पानी की कमी के बीच यह साफ हो गया है कि भविष्य की खेती वही होगी, जिसमें कम संसाधनों में अधिक उत्पादन लिया जा सके। ऐसे में सहजन, नींबू, अनार, अमरूद जैसी फसलें और ड्रिप इरिगेशन तकनीक किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रही हैं।
