समाचार मिर्ची

वन और वन्य प्राणी संरक्षण संवर्धन हेतु संघर्षरत बांधवगढ़ फाउंडेशन की प्रबंधन न्यासी एवं मातृभूमि फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती वंदना द्विवेदी ने मध्य प्रदेश में बाघों के सिकुड़ रहे आवास स्थल पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है यह चिंता की बात है मध्य प्रदेश टाइगर स्टेट होने के गौरव से नवाजा गया। लेकिन आज हमारे बाघ जिनकी आबादी जितनी तेजी से बड़ी हे उतनी ही तेजी से उनके जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा हे , है, 785 बाघ हमारे मध्यप्रदेश में ।जिसमें से 220 बाघों की मौत 5 वर्ष में , 92 ने जंगल के बाहर दम तोड़ । टाइगर रिजर्व से बाहर निकलने के बाद हर चौथे बाघ की मौत या का कारण स्पष्ट है, हमारे जंगल अवैध कब्जे, से कंक्रीट का जंगल बनाने से, सिकुड़ रहे हैं दिन प्रतिदिन हमारे बैगन को अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है जब उनके आवास स्थल छोटा होगा तो निश्चित ही उन्हें बाहर जाने पर विवश होना पड़ेगा। और बाहर उनके लिए खतरा ही खतरा है । 785 बाघों में 59.6 प्रतिशत टाइगर रिजर्व में रह रहे हैं, ओर 40.4 प्रतिशत बाघ बाहर जंगलों में घूम रहे हैं जो गांवों में भी जाकर मवेशियों का शिकार करते हे , इंसानों को भी जान का खतरा रहता हे , जिस कारण बाहर बाघ भी सुरक्षित नहीं है। हमे अपने वनों को सुरक्षित करना होगा साथ ही बाघों के रहवास स्थल को प्राकृतिक ही रहने दिया जाए कांक्रीट का जंगल नहीं बनने दिया जाए , साथ ही जितने भी अवैध निर्माण वन क्षेत्र में हुए हैं, उनकी जांच कर तत्काल प्रभाव से हटाया जाए । नदियों, पहाड़ों ,झरनों को प्राकृतिक स्वरूप में ही रहने दिया जाए। गर्मी आते ही पानी की पर्याप्त व्यवस्था उन स्थानों में की जाए जहां पानी नहीं है। पानी की तलाश में भी बाघ जंगल से बाहर जाते हैं, जहां वो सुरक्षित नहीं रहते । इस विषय पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है क्योंकि आवास स्थल यदि बाघ अगर सुरक्षित रहेंगे तो सब कुछ सुरक्षित रहेगा। मानव, वन और वन्य प्राणी सभी सुरक्षित संरक्षित रहेंगे।

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