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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई कृषक उन्नति योजना राज्य के धान उत्पादक किसानों के लिए आय बढ़ाने और फसल का सही मूल्य दिलाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों से धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से की जा रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य और निर्धारित मूल्य के बीच का अंतर राज्य सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता के रूप में भेजती है।

योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि प्रति एकड़ धान खरीदी की सीमा बढ़ाकर 21 क्विंटल कर दी गई है। इससे किसान अधिक पैदावार करके ज्यादा मात्रा में धान बेच सकते हैं। अंतर की राशि आधार से लिंक बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाती है। पैसा ट्रांसफर होते ही किसानों को मोबाइल पर संदेश मिल जाता है।योजना का लाभ उठाने के लिए किसान को छत्तीसगढ़ का निवासी होना चाहिए और समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकरण कराना आवश्यक है। लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, ऋण पुस्तिका या भू-स्वामी प्रमाण पत्र और चालू मोबाइल नंबर होना जरूरी है। सोसायटियों या खरीफ पंजीयन पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को धान बेचने के बाद अंतर राशि सीधे मिल जाती है।

3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से धान की खरीदी

धान उत्पादक किसानों के लिए फसल की बिक्री का भाव सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होता है। बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकारी खरीद और मूल्य सहायता किसानों को एक निश्चित व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद करती है।

कृषक उन्नति योजना के तहत धान की खरीदी को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर से जोड़ा गया है। इसमें MSP के तहत मिलने वाली राशि और निर्धारित मूल्य के बीच जो अंतर बनता है, उसे राज्य सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाता है।

इस तरह किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर प्रभावी मूल्य उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि वास्तविक भुगतान योजना के नियमों, खरीदी की मात्रा और पात्रता के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है।

कौन किसान ले सकता है योजना का लाभ?

कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने के लिए किसान का छत्तीसगढ़ का निवासी होना जरूरी है। इसके अलावा समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसान को संबंधित किसान पंजीयन व्यवस्था में अपना पंजीकरण कराना होता है।

दी गई जानकारी के अनुसार किसानों के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक है। इसके अलावा सोसायटी या खरीफ पंजीयन पोर्टल पर पंजीकृत किसान निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी धान की उपज बेच सकते हैं।

इसलिए जिन किसानों ने अभी तक अपना पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें संबंधित विभाग या स्थानीय सहकारी समिति से प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।

कुल मिलाकर कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ के धान उत्पादक किसानों के लिए बेहतर मूल्य और आय सहायता से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी पहल है। योजना के तहत 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के निर्धारित मूल्य और MSP के बीच की अंतर राशि DBT के माध्यम से पात्र किसानों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी सीमा, आधार लिंक बैंक खाता और किसान पंजीकरण जैसी व्यवस्थाओं के कारण किसानों के लिए अपने रिकॉर्ड को अपडेट रखना बेहद जरूरी है। पात्र किसान निर्धारित प्रक्रिया के तहत धान बेचकर योजना के लाभ का दावा कर सकते हैं।

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