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नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में गुरुवार को महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026 पेश किए गए। केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक पेश किया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक पेश किया। इन विधेयकों का उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह लागू करना है।

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करता है। परिसीमन विधेयक चुनाव क्षेत्रों की नई सीमाओं का निर्धारण करने के लिए एक आयोग गठित करने का प्रावधान करता है। यह विधेयक 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण और परिसीमन को जोड़ता है। इनमें से कुछ विधेयक संवैधानिक संशोधन हैं, जिन्हें पारित करने के लिए दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है।

सरकार का लक्ष्य इन प्रावधानों को 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू करना है। वर्तमान में लोकसभा में राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सीटें हैं। परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें बढ़कर 815 और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटें 35 हो सकती हैं।नंबर गेम के अनुसार, लोकसभा में प्रभावी सदस्य संख्या 541 है और दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए। एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, जो 67 कम हैं। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 वोट जरूरी हैं, जबकि एनडीए के पास 142 सदस्य हैं, जो 21 कम हैं।केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण के सिद्धांत और भावना के तौर पर सभी दल एक साथ हैं और कोई दल इसका विरोध नहीं कर रहा है।

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