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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर जमकर निशाना साधा है। एक बांग्ला समाचार चैनल को दिए विशेष साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य की अस्मिता, जनता के मताधिकार और बंगाल के हितों की रक्षा के लिए वह सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हर स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर विवाद चरम पर है। मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया को ‘साजिश’ करार देते हुए आरोप लगाया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 58 लाख लोगों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है, जो मुख्य रूप से गरीब, महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित कर रही है।

वही, SIR विवाद और ममता का गुस्साममता बनर्जी ने साक्षात्कार में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या एक संवैधानिक संस्था को महिलाओं और गरीबों को इस तरह अपमानित करने का अधिकार है? यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं।” उन्होंने SIR को बंगाल को वंचित करने की ‘गहरी साजिश’ बताया और कहा कि यह प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले राज्य को निशाना बना रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पहले चरण में ही 58 लाख नाम ‘मृत घोषित’ कर हटाए गए, जिसमें कई जीवित लोग शामिल हैं। उन्होंने इसे ‘एंटी-वूमन’ और भेदभावपूर्ण बताया, क्योंकि महिलाओं के नामों में अधिक कटौती हुई है।

इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, यह विवाद SIR प्रक्रिया से जुड़ा है, जो नवंबर 2025 से चल रही है। दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने पर 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे, जिनमें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लिकेट मतदाता शामिल थे। सुनवाई प्रक्रिया फरवरी 2026 में पूरी हुई, जहां दावे-आपत्तियों (Form 7) के बाद अतिरिक्त 6-6.25 लाख नाम हटाने की संभावना जताई गई। अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी। TMC का आरोप है कि यह प्रक्रिया योग्य मतदाताओं को हटाने के लिए इस्तेमाल हो रही है, जबकि ECI का कहना है कि इसका उद्देश्य शुद्ध और निष्पक्ष मतदाता सूची बनाना है, जिसमें कोई योग्य मतदाता छूटे नहीं।

बताते चले कि, ममता बनर्जी ने 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर याचिका पर दलीलें दीं, जो एक दुर्लभ घटना है। वे पहली बैठी मुख्यमंत्री बनीं जिन्होंने अपनी याचिका पर खुद बहस की। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ECI को नोटिस जारी किया और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। ममता ने अदालत में कहा कि SIR ‘डिलीशन’ के लिए है, ‘इनक्लूजन’ के लिए नहीं। उन्होंने ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ जैसे आधारों पर नाम हटाने की आलोचना की और पूछा, “क्यों सिर्फ बंगाल, असम क्यों नहीं?” उन्होंने दावा किया कि प्रक्रिया से 150 से अधिक मौतें हुईं, जिसमें BLO (Booth Level Officers) पर दबाव के कारण आत्महत्या के मामले शामिल हैं।

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