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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली।आम की खेती में जनवरी का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय पेड़ों पर बौर आने की शुरुआत होती है, जो फसल की पैदावार और गुणवत्ता के लिए निर्णायक साबित होता है। किसानों को इस दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि मौसम में बदलाव और ओस के कारण कीटों और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

जनवरी में बौर पर भुनगा जैसे कीट रस चूसकर फूलों को सुखा सकते हैं, जबकि पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारी सफेद पाउडर के रूप में फैल सकती है। किसानों को वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित कीटनाशक और फफूंदनाशक का सही समय पर छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव के दौरान मधुमक्खियों को नुकसान न पहुंचे, क्योंकि वे परागण में सहायक होती हैं। हल्की सिंचाई और बाग की सफाई से नमी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

आम खाने के लिए मई और जून के महीने सबसे अच्छे होते हैं। इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है और आम पेड़ पर ही प्राकृतिक रूप से पककर पूरी तरह मीठे हो जाते हैं। दशहरी, लंगड़ा और चौसा जैसी किस्में बाजार में पूरी मिठास और स्वाद के साथ उपलब्ध होती हैं। जून के अंत तक आम का सीजन समाप्त हो जाता है।

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