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अमेरिका। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) का लक्ष्य होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है, जो वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। लेबनान में सीजफायर इस रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद ईरान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना है। सऊदी अरब ने युद्ध की बजाय कूटनीति पर जोर दिया है।

लेबनान में 10 दिन का सीजफायर लागू हुआ है, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की। यह सीजफायर इजरायल-लेबनान के बीच है, जिसमें इजरायल को हमले रोकने की शर्त शामिल है। सीजफायर की शर्तों में इजरायल की 10 किलोमीटर सिक्योरिटी जोन वाली योजना भी है। 34 साल बाद इजरायल और लेबनान के नेता मिले, जिसके बाद यह सीजफायर हुआ।

एक निजी फोन कॉल में MBS ने ट्रंप से कहा कि यदि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ानी है और क्षेत्र में स्थिरता लानी है तो लेबनान में सीजफायर बेहद जरूरी है। MBS ने ईरान की शर्तों को आधार बनाकर ट्रंप पर दबाव डाला। इसके बाद ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीजफायर के लिए राजी किया।

पश्चिमी और अरब अधिकारियों के हवाले से मिडिल ईस्ट आई रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रंप के 10 दिन के सीजफायर के पीछे सऊदी लॉबिंग का हाथ था। सीजफायर से क्षेत्र में स्थिरता और ईरान-अमेरिका बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है।

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