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मेलबर्न। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश की घोषणा की गई। ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड ऑस्ट्रेलियनसुपर ने यह एलान किया, जिसकी जानकारी पीएम मोदी ने एक्स पर साझा की।

प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार को मेलबर्न में ‘इंडिया-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम’ और ‘इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन’ में शामिल हुए। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है, ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में आगे बढ़ना जरूरी है।

पीएम मोदी ने इस निवेश का स्वागत करते हुए इसे भारत की विकास यात्रा में वैश्विक भरोसे की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि यह निवेश भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था द्वारा ग्लोबल निवेशकों को दिए जा रहे अवसरों को भी दर्शाता है।बुधवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान दोनों देशों की साझा विरासत का जश्न मनाते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड रवाना होंगे।

क्यों अहम है 500 मिलियन डॉलर का निवेश?

ऑस्ट्रेलियनसुपर द्वारा घोषित 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का निवेश केवल एक वित्तीय सौदा नहीं माना जा रहा, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बढ़ते विश्वास का भी संकेत है। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र किसी भी देश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ माना जाता है। सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, ऊर्जा परियोजनाएं, शहरी विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलती है और आर्थिक विकास को दीर्घकालिक आधार मिलता है।

अंत मे बता दें कि.ऑस्ट्रेलियनसुपर द्वारा भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश की घोषणा भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह निवेश केवल वित्तीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक क्षमता, नीतिगत स्थिरता और विकास की संभावनाओं पर वैश्विक निवेशकों के भरोसे को भी दर्शाता है। आने वाले समय में यदि दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार का यह सहयोग इसी तरह आगे बढ़ता है, तो इससे न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलेगा बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक साझेदारी भी और अधिक मजबूत होगी।

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