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अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी अनुकल्प मिश्र ने 900 ग्राम सोना गलवाने के लिए सराफा कारोबारी विजय कौशल को दिया था। पुलिस ने अनुकल्प, लवकुश और करुणेश की कस्टडी रिमांड ली है, जो गुरुवार रात 10 बजे पूरी हो जाएगी। पुलिस इनसे सघन पूछताछ कर रही है।अनुकल्प दान के आभूषण चुराकर गलाने के लिए देता था और बदले में रुपये लेकर संपत्तियां खरीद रहा था। पुलिस आज इन आरोपियों से नकदी और आभूषण बरामद कर सकती है। अनुकल्प के पिता रवींद्र मिश्र, चाचा रामेंद्र मिश्र और सराफा कारोबारी विजय कौशल से भी पूछताछ की गई है।

आरोपियों ने बताया कि उन्हें गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव टिन्नू का सहयोग मिला था। टिन्नू की चोरी पहले पकड़ी गई थी, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने आरोपियों से कुछ संपत्तियों की जानकारी ली और भीखापुर के बाग में धनराशि बंटवारे की बात की पुष्टि कराई।पुलिस संपत्तियों की पड़ताल और सोने के एवज में मिली रकम की जांच तेज कर रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान अनुकल्प मिश्र ने कथित रूप से मंदिर में चढ़ाए गए लगभग 900 ग्राम सोने को गलाने के लिए एक सराफा कारोबारी को दिए जाने की जानकारी दी। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सोने के बदले प्राप्त धनराशि का उपयोग किन-किन कार्यों में किया गया और क्या उससे अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

पुलिस ने इस मामले में आरोपी अनुकल्प मिश्र, लवकुश और करुणेश को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की। रिमांड अवधि गुरुवार रात तक निर्धारित थी, जिसके दौरान जांच अधिकारियों ने तीनों आरोपियों से कई चरणों में पूछताछ की। पुलिस का उद्देश्य चोरी की पूरी श्रृंखला, इसमें शामिल संभावित व्यक्तियों और कथित रूप से चोरी किए गए धन एवं आभूषणों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस लगातार नए साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। आरोपियों से पूछताछ, कथित नकदी और आभूषणों की बरामदगी, संपत्तियों की जांच तथा वित्तीय लेन-देन की पड़ताल इस जांच के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।

फिलहाल मामले में सामने आई अधिकांश जानकारियां पुलिस जांच और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हैं। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे। ऐसे मामलों में कानूनी सिद्धांत के अनुसार, किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है।

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