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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत की बढ़ती प्रगति और ताक़त से दुनिया चिंतित है और यही कारण है कि भारतीय वस्तुओं पर बार-बार टैरिफ़ (आयात शुल्क) लगाए जा रहे हैं। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब भारत बड़ा होता है और आगे बढ़ता है, तो कुछ देशों में डर पैदा होता है कि उनकी स्थिति क्या होगी। इसी डर की वजह से भारतीय वस्तुओं पर अनुचित शुल्क लगाए जा रहे हैं।

भागवत ने कहा कि मनुष्य और राष्ट्र जब तक अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं समझेंगे, तब तक वे समस्याओं का सामना करते रहेंगे. यदि हम करुणा दिखाएं और भय पर विजय पाएं, तो हमारा कोई शत्रु नहीं रहेगा. संघ प्रमुख ने कहा कि भारत महान है और भारतीयों को भी महान बनने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत बड़ा है तथा वह और बड़ा होना चाहता है.आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अगर मनुष्य अपना रवैया ‘‘मैं’’ से ‘‘हम’’ में बदल लें तो सभी मुद्दे सुलझ जाएंगे. उन्होंने कहा,

“मनुष्य और राष्ट्र जब तक अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं समझेंगे, तब तक समस्याओं का सामना करते रहेंगे। यदि हम करुणा दिखाएं और भय पर विजय पाएं तो हमारा कोई शत्रु नहीं रहेगा।”

भागवत ने चेतावनी दी कि आयात-निर्यात की निर्भरता अगर विवेकपूर्ण न हो तो यह भविष्य में मजबूरी बन सकती है। इसीलिए उन्होंने स्वदेशी का मंत्र दोहराते हुए कहा कि भारतीयों को अपने संसाधनों और कौशल पर भरोसा करना चाहिए।

वैश्विक राजनीति और भारत की भूमिका

भागवत का यह बयान केवल टैरिफ़ विवाद तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का भी संकेत था। हाल के वर्षों में भारत ने अर्थव्यवस्था, रक्षा, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यही कारण है कि कुछ पश्चिमी देश भारत की तेज़ी से बढ़ती ताक़त से असहज महसूस कर रहे हैं।

मोहन भागवत का यह बयान भारत की प्रगति, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक शक्ति के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब दुनिया के डर से पीछे हटने वाला नहीं है, बल्कि अपनी आध्यात्मिक और आर्थिक शक्ति से दुनिया को समाधान दिखाने वाला राष्ट्र है।

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