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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। मशरूम फार्मिंग कम जगह और कम लागत में घर बैठे कमाई का तरीका है। इसके लिए बड़े खेत या जमीन की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह इनडोर खेती है, जिसमें सूरज की सीधी रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती। घर के खाली कमरे, पुराने शेड या गैराज से इसकी शुरुआत आसानी से की जा सकती है। युवा पीढ़ी और छोटे किसान भी इसकी ओर रुख कर रहे हैं।

इस कड़ी में बता दें कि, बिना जमीन के शुरुआत के लिए 10×10 के कमरे में लकड़ी या लोहे के रैक तैयार किए जाते हैं। वर्टिकल फार्मिंग से एक के ऊपर एक रैक लगाकर कम जगह में अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। कमरे का तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस रखना और नमी बनाए रखना जरूरी है, जिसके लिए पानी का छिड़काव या ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जाता है। सही वेंटिलेशन और साफ-सफाई से साल भर मशरूम उगाए जा सकते हैं। सेटअप का खर्च मामूली होता है।

यहां यह जानकारी दे दें कि, मशरूम उगाने के लिए मिट्टी की जगह कंपोस्ट की जरूरत होती है। इसे गेहूं या धान के भूसे, जिप्सम और खाद मिलाकर तैयार किया जाता है। कंपोस्ट को प्लास्टिक बैग्स में भरकर उसमें स्पॉन (मशरूम के बीज) मिलाए जाते हैं। बैग्स को बंद करके अंधेरे कमरे में रखा जाता है, ताकि कवक जाल फैल सके। सफेद फफूंद दिखने पर कोकोपीट या हल्की मिट्टी की केसिंग लगाई जाती है। कुछ दिनों बाद छोटी पिंन्स निकलती हैं। सही समय पर पानी का स्प्रे करने से 20 से 25 दिनों में मशरूम कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं।

वही, यह भी बताते चले कि, बिजनेस के लिहाज से शुरुआत में 10 से 15 हजार रुपये लगाकर छोटे स्तर पर ट्रायल किया जा सकता है। बाजार में बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम की मांग रहती है, जो स्थानीय मंडियों, होटलों और सुपरमार्केट्स में अच्छे दामों में बिक जाते हैं। तकनीक समझने के बाद बड़े शेड बनाकर कमर्शियल स्तर पर काम शुरू किया जा सकता है। न्यूट्रिशन और प्रोटीन से भरपूर होने के कारण मशरूम की मांग बढ़ रही है। सही मार्केटिंग और क्वालिटी बनाए रखकर कम लागत में हर महीने 30 से 50 हजार रुपये या उससे ज्यादा की कमाई की जा सकती है।

बिना खेत के कैसे शुरू करें मशरूम की खेती?

यदि आपके पास कृषि भूमि नहीं है, तब भी आप आसानी से मशरूम की खेती शुरू कर सकते हैं। शुरुआत के लिए लगभग 10×10 फीट का एक कमरा पर्याप्त माना जाता है। इस कमरे में लकड़ी या लोहे के रैक लगाए जाते हैं, जिन पर मशरूम उत्पादन के लिए बैग व्यवस्थित किए जाते हैं।

आजकल वर्टिकल फार्मिंग तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसमें एक के ऊपर एक कई रैक लगाकर कम जगह में अधिक संख्या में बैग रखे जा सकते हैं। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ती है और उपलब्ध स्थान का अधिकतम उपयोग संभव हो जाता है।

मिट्टी नहीं, कंपोस्ट में होती है मशरूम की खेती

सामान्य फसलों की तरह मशरूम की खेती मिट्टी में नहीं की जाती। इसके लिए विशेष प्रकार का कंपोस्ट तैयार किया जाता है। कंपोस्ट बनाने में मुख्य रूप से गेहूं या धान का भूसा, जिप्सम और जैविक खाद जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है।

तैयार कंपोस्ट को प्लास्टिक के बैगों में भरकर उसमें स्पॉन यानी मशरूम के बीज मिलाए जाते हैं। इसके बाद बैग को अच्छी तरह बंद करके अंधेरे और नियंत्रित वातावरण वाले कमरे में रखा जाता है। कुछ दिनों में बैग के भीतर सफेद रंग का कवकीय जाल (माइसीलियम) फैलने लगता है, जो इस बात का संकेत होता है कि मशरूम का विकास सही दिशा में हो रहा है।

आखिर में बता दें कि, कम जगह, सीमित निवेश और नियंत्रित वातावरण में होने वाली मशरूम की खेती आज कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार का एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही है। जिन लोगों के पास खेती योग्य जमीन नहीं है, वे भी घर के खाली कमरे या छोटे शेड से इसकी शुरुआत कर सकते हैं। यदि तापमान, नमी, स्वच्छता और कंपोस्ट की गुणवत्ता का सही प्रबंधन किया जाए तो मशरूम की खेती से नियमित उत्पादन और बेहतर आय की संभावना बनाई जा सकती है। आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ यह खेती छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक प्रभावी माध्यम साबित हो रही है।

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