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नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर शहर में आज सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा, मारबत उत्सव, बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। यह अनूठा उत्सव, जो सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता का प्रतीक है, हर साल की तरह इस बार भी शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

मारबत उत्सव की शुरुआत 1885 में हुई थी और तब से यह नागपुर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गया है। इस उत्सव में विशालकाय पुतले बनाए जाते हैं, जो सामाजिक कुरीतियों और बुराइयों का प्रतीक होते हैं। इन पुतलों को रंग-बिरंगे कपड़ों और आकर्षक सजावट के साथ शहर की सड़कों पर जुलूस के रूप में ले जाया जाता है और अंत में इन्हें जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।

इस बार के उत्सव में हजारों लोग शामिल हुए। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों ने जुलूस में हिस्सा लिया, जिसमें ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक नृत्यों ने माहौल को और जीवंत बना दिया। विशेष रूप से पीली मारबत और काली मारबत के पुतले इस उत्सव की शान माने जाते हैं, जो क्रमशः सामाजिक और राजनीतिक बुराइयों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

स्थानीय आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष मारबत उत्सव में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया। पुतलों को बनाने में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग किया गया, ताकि उत्सव का पर्यावरण पर कम से कम प्रभाव पड़े।

नागपुर के जिलाधिकारी ने इस अवसर पर लोगों से सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मारबत उत्सव केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक माध्यम है।”

यह उत्सव न केवल नागपुर की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि एकजुट होकर समाज की कमियों को दूर किया जा सकता है। देर रात तक चले इस उत्सव में हर आयु वर्ग के लोग शामिल हुए और नागपुर की सड़कों पर उत्साह का माहौल बना रहा।
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