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समाचार मिर्ची

मुंबई। महाराष्ट्र में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। मुंबई समेत कई बाजारों में प्याज के दाम बढ़ने से ग्राहकों की जेब पर असर पड़ा है। होलसेल कारोबारियों को भी कारोबार प्रभावित होने की चिंता सता रही है। व्यापारियों के मुताबिक, महंगे प्याज के चलते ग्राहक अब पहले की तुलना में कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

यहां हम आपको बता दें कि, मुंबई के बाजारों में प्याज के दाम बढ़ने को लेकर कारोबारियों और ग्राहकों में नाराजगी साफ नजर आ रही है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में प्याज की आवक कम हुई है, जिसका असर कीमतों पर पड़ा है। होलसेल व्यापारियों के अनुसार, कीमतों में तेजी का सीधा असर बिक्री पर पड़ा है। पहले जो ग्राहक ज्यादा मात्रा में प्याज खरीदते थे, अब वे कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं। इससे कारोबार करीब 20 से 30 फीसदी तक प्रभावित हुआ है।

वहीं यह भी बताते चले कि, प्याज के होलसेल व्यापारी चंद्रकांत मालुसरे ने कहा कि प्याज के भाव बढ़े हैं और बाजार में माल की आवक भी कम हुई है। उनके मुताबिक, महंगाई के कारण लोग पहले की तुलना में कम मात्रा में प्याज खरीद रहे हैं। नींबू के होलसेल व्यापारी मोहम्मद अकरम ने कहा कि सरकार को एक दिन बाजार में आकर कारोबार करके देखना चाहिए। उनका कहना है कि आम लोग महंगाई का सामना कर रहे हैं, जबकि सरकार में बैठे लोग इसकी मुश्किलों को सीधे तौर पर महसूस नहीं करते।

इस संबंध मेंबता दे कि, बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों ने भी बढ़ती महंगाई को लेकर नाराजगी जाहिर की। एक महिला ने महाराष्ट्र सरकार की लाडली बहन योजना पर तंज कसते हुए कहा, “लाडली बहन को 2000 रुपये देते हैं, लेकिन हमसे ही 5000 रुपये ले लेते हैं।” लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के बावजूद अगर रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम लगातार बढ़ते रहें, तो परिवार का बजट संभालना मुश्किल हो जाता है। बढ़ती कीमतों ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। खासकर रोजमर्रा की सब्जियों के दाम बढ़ने से कम आय वाले परिवारों का घरेलू बजट ज्यादा प्रभावित हो रहा है।

कम आवक को बताया जा रहा है कीमत बढ़ने की वजह

प्याज की कीमतों में तेजी को लेकर थोक व्यापारियों का कहना है कि बाजार में पहले की तुलना में माल की आवक कम हुई है। आवक में कमी का असर थोक कीमतों पर पड़ता है और इसके बाद खुदरा बाजार में भी ग्राहकों को अधिक कीमत का सामना करना पड़ सकता है।

प्याज रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। भारतीय भोजन में इसका इस्तेमाल सब्जियों, दाल, सलाद, चटनी और कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने पर परिवारों के मासिक या साप्ताहिक घरेलू बजट पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

हालांकि प्याज की कीमत केवल एक ही कारण से तय नहीं होती। फसल की उपलब्धता, मंडी में आवक, मौसम, भंडारण, परिवहन लागत और स्थानीय मांग जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए किसी एक बाजार में कीमत बढ़ने के पीछे स्थानीय आपूर्ति की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

कुल मिलाकर, प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर खाद्य महंगाई और कृषि उपज की आपूर्ति व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। जहां किसान और व्यापारी उचित बाजार मूल्य की उम्मीद करते हैं, वहीं आम उपभोक्ता चाहता है कि रोजमर्रा की रसोई की जरूरी वस्तुएं उसकी पहुंच में बनी रहें। ऐसे में बाजार की निगरानी और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखना आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

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