नई दिल्ली । भरकर जल चढ़ाते हैं। लेकिन रोज-रोज तुलसी में पानी डालना पौधे की सेहत के लिए सही नहीं है। जरूरत से ज्यादा पानी देने की वजह से हरा-भरा पौधा सूखने लगता है। तुलसी एक नाजुक पौधा है और इसकी जड़ों को सांस लेने के लिए हल्की हवा की जरूरत होती है। जब गमले की मिट्टी लगातार गीली रहती है तो जड़ें अंदर ही अंदर सड़ने लगती हैं और पत्तियां झड़ने लगती हैं।
इस कड़ी मे हम आपको बता दें कि, गर्मियों में तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते गमले की मिट्टी बहुत जल्दी सूख जाती है। ऐसे मौसम में तुलसी को रोज पानी की जरूरत पड़ती है। सुबह के वक्त या शाम को सूरज ढलने के बाद ही पानी दें। दोपहर की तेज धूप में पानी न डालें वरना पौधे को झटका लग सकता है। सर्दियों के मौसम में धूप कम निकलती है और मिट्टी में नमी कई दिनों तक बनी रहती है। रोज पानी डालने से पौधे पर फंगस लग सकती है। सर्दियों में हफ्ते में केवल दो या तीन बार ही हल्का पानी देना काफी होता है।
वही हम आपको यह भी बता दें कि, बारिश के दिनों में हवा में नमी हो और रोज बारिश हो रही हो तो गमले में अलग से पानी बिल्कुल न डालें। गमले के नीचे का छेद खुला होना चाहिए जिससे जमा हुआ फालतू पानी आसानी से बाहर निकल सके। पानी देने का आसान तरीका है उंगली से मिट्टी चेक करना। उंगली को गमले की ऊपरी मिट्टी में एक इंच अंदर दबाकर देखें। अगर मिट्टी सूखी लगे तभी पानी डालें। अगर मिट्टी गीली या चिपचिपी महसूस हो रही हो तो उस दिन पानी डालने से बचें। पौधे में उतना ही पानी डालें जितनी मिट्टी सोख सके। गमले को पानी से लबालब भरने की गलती न करें।
आखिर में बताते चले कि, हफ्ते में एक बार किसी खुरपी की मदद से गमले की ऊपरी मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें। इससे जड़ों तक ताजी हवा पहुंचती है और फंगस का खतरा टल जाता है। तुलसी के पौधे को दिन में कम से कम चार से पांच घंटे की अच्छी धूप मिले। अगर पौधे पर मंजरी यानी बीज आने लगें तो उन्हें तुरंत तोड़कर हटा दें। मंजरी लगे रहने से पौधे की सारी ताकत बीज बनाने में चली जाती है और नई पत्तियां आना रुक जाती हैं। तुलसी को हमेशा हरा-भरा रखने का राज पानी की मात्रा में नहीं बल्कि मौसम के हिसाब से सही देखभाल में छुपा है। मिट्टी की जरूरत को समझकर पानी दें तो तुलसी सालों-साल हरी-भरी और घनी बनी रहेगी।
