नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के तीसरे सप्ताह का दूसरा दिन मंगलवार को हंगामे के बीच शुरू हुआ। सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा किया। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इस सत्र के लगभग हर दिन की कार्यवाही हंगामेदार रही है। छात्रों का मुद्दा और चढ़ावा चोरी जैसे मामलों पर विपक्ष का विरोध-प्रदर्शन जारी है। सोमवार को भी लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा किया था, जिसके बाद लोकसभा को पहले 12 बजे और फिर दो बजे तक तथा राज्यसभा को भी दो बजे तक स्थगित करना पड़ा था। सत्र का पहला हफ्ता हंगामे की भेंट चढ़ गया था, जबकि दूसरे हफ्ते में लोकसभा से तीन और राज्यसभा से दो बिल पारित हुए थे।
यहां हम आपको जानकारी दे दें कि, मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने वाली हैं। लोकसभा की संशोधित कार्यसूची के अनुसार यह विधेयक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है। वित्त मंत्री सदन से विधेयक पेश करने की अनुमति मांगेंगी और इसके बाद इसे औपचारिक रूप से पेश करेंगी। साथ ही वह आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 जारी करने की आवश्यकता और उसके कारणों से जुड़ा स्पष्टीकरण भी सदन के पटल पर रखेंगी।
हंगामे के बीच विधायी कार्य पर असर
लगातार हो रहे व्यवधानों का असर संसद के विधायी एजेंडे पर भी पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण विधेयकों और सरकारी कार्यों पर चर्चा का समय प्रभावित हो रहा है। संसदीय कार्यवाही बाधित होने से प्रश्नकाल, शून्यकाल और विधेयकों पर विस्तार से चर्चा जैसे महत्वपूर्ण संसदीय कार्य भी प्रभावित होते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो मॉनसून सत्र के शेष दिनों में भी विधायी कार्य प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर संसदीय परंपरा के अनुसार सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी होती है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ सदन की कार्यवाही भी सुचारु रूप से चलती रहे।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि दिन के दूसरे हिस्से में लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर क्या सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाती है या फिर हंगामे का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। वहीं, वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तावित टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पर भी संसद की आगे की कार्यवाही के दौरान विशेष ध्यान रहेगा।
