वाराणसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जन्मदिन पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बनारस के एक घाट पर विशेष आयोजन किया। कार्यकर्ताओं ने मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल और दूध से राहुल गांधी के पोस्टर का दुग्धाभिषेक किया।पोस्टर में राहुल गांधी एक हाथ में संविधान की प्रति और दूसरे हाथ में फरसा थामे दिखाए गए हैं। फरसा भगवान परशुराम का प्रतीक माना जाता है। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यहां यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी निवासी हैं।
कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया और मीडिया में प्रसारित होने के बाद बहस शुरू हो गई। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताया और माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भगवान हो सकते हैं लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं।
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के मध्य प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राजनीतिक व्यक्ति हैं, उनका सम्मान अपनी जगह है, लेकिन उनकी तुलना भगवान परशुराम से करना उचित नहीं है। उन्होंने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक उपयोग से बचने की सलाह दी।
राहुल गांधी के जन्मदिन पर आयोजित यह कार्यक्रम वाराणसी के एक घाट पर हुआ, जहां यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल और दूध से पोस्टर का दुग्धाभिषेक किया। आयोजन में शामिल कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को संविधान और सामाजिक न्याय की आवाज बताते हुए उनके लंबे राजनीतिक जीवन और जनसरोकारों के मुद्दों को उठाने की भूमिका की सराहना की।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब वाराणसी देश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का भी मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में राहुल गांधी के जन्मदिन पर आयोजित इस कार्यक्रम को स्थानीय और राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
राहुल गांधी के जन्मदिन पर आयोजित यह कार्यक्रम अब केवल एक राजनीतिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक प्रतीकों, राजनीतिक संदेशों और सार्वजनिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन को लेकर एक व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं इसे और अधिक चर्चा में ला सकती हैं।
