नई दिल्ली।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और डीआरडीओ चेयरमैन समीर कामत भी मौजूद रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करना और देश की समग्र रक्षा तैयारियों तथा परिचालन तैयारियों का जायजा लेना था। यह बैठक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच बुलाई गई थी।बैठक पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के चौथे सप्ताह में हुई है, जिसमें हार्मुज जलडमरूमध्य के व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में इस स्थिति को चिंताजनक बताया था। आज राज्यसभा में भी वे इस मुद्दे पर बोल सकते हैं।रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाओं के मद्देनजर भारत की रक्षा क्षमता पर विस्तार से चर्चा हुई।
पश्चिम एशिया संकट का बढ़ता असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सबसे बड़ा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर पड़ रहा है, विशेष रूप से हार्मुज जलडमरूमध्य के आसपास। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए चिंता का विषय बन गया है। इसी पृष्ठभूमि में यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रक्षा तैयारियों की समीक्षा
रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत की सैन्य तैयारियों का गहन मूल्यांकन किया गया। इसमें थल, जल और वायु – तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और समन्वय तंत्र पर विशेष ध्यान दिया गया।
बैठक के दौरान यह भी देखा गया कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति और अधिक बिगड़ती है, तो भारत किस प्रकार अपने नागरिकों, व्यापारिक हितों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। इसके अलावा, संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।
कुल मिलाकर, यह बैठक भारत की रणनीतिक सतर्कता और सुरक्षा के प्रति गंभीरता को दर्शाती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
