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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच जारी है। जांच के दौरान रामलला को भेंट की गई 60 किलो चांदी की शिलाएं सबसे बड़ी पहेली बन गई हैं। जांच टीम को इन शिलाओं का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या मौजूदा स्थिति अब तक नहीं मिली है।

ज्वेलर्स एसोसिएशन का दावा है कि शिलाएं ट्रस्ट को रसीद के साथ सौंपी गई थीं। संगठन के अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी के अनुसार, देशभर के ज्वेलर्स के सहयोग से तैयार ये शिलाएं राम मंदिर ट्रस्ट को दी गई थीं। ज्वेलर्स एसोसिएशन का कहना है कि नींव पूजन और निर्माण के दौरान ये शिलाएं कहीं दिखाई नहीं दीं और बाद में उनका कोई पता नहीं चला।

जांच में जौनपुर के विश्वकर्मा परिवार द्वारा रामलला को भेंट किया गया बहुमूल्य हार भी रिकॉर्ड से गायब है। इस हार और चरण पादुका का कोई रिकॉर्ड एसआईटी को नहीं मिला है। पुजारी मोहित पांडेय ने बताया कि हार रामलला को पहनाने के बाद टिन्नू यादव को सौंप दिया गया था। टिन्नू यादव का दावा है कि इसे गलाने के लिए बेंगलुरु भेज दिया गया, लेकिन इसकी कोई ठोस रसीद या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।

एसआईटी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, कृष्णदेव तिवारी और रामलला के पुजारियों से पूछताछ कर रही है। कृष्णदेव तिवारी ने हार, चरण पादुका और चांदी की शिलाओं के बारे में जानकारी होने से इनकार किया है। जांच टीम चढ़ावे के संग्रह, संरक्षण और रिकॉर्डिंग की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है।

चांदी की शिलाओं को लेकर क्या है मामला?

ज्वेलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का दावा है कि देशभर के सर्राफा कारोबारियों और ज्वेलर्स समुदाय के सहयोग से विशेष रूप से तैयार की गई 60 किलो चांदी की शिलाएं राम मंदिर ट्रस्ट को विधिवत रसीद के साथ सौंपी गई थीं। इन शिलाओं को धार्मिक आस्था और मंदिर निर्माण में योगदान के प्रतीक के रूप में देखा गया था।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी के अनुसार, चांदी की शिलाओं का हस्तांतरण पूरी प्रक्रिया के साथ किया गया था और इसके दस्तावेज भी मौजूद होने चाहिए। हालांकि, एसआईटी को अब तक ऐसे रिकॉर्ड नहीं मिले हैं जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि इन शिलाओं का उपयोग कहां हुआ, वे वर्तमान में कहां हैं या उनका आधिकारिक लेखा-जोखा किस रूप में दर्ज किया गया।

यही कारण है कि जांच एजेंसियां अब उन सभी दस्तावेजों, रसीदों और रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं जो मंदिर ट्रस्ट और संबंधित पक्षों के पास उपलब्ध हो सकते हैं।

चरण पादुका का भी रिकॉर्ड नहीं

जांच में एक अन्य महत्वपूर्ण विषय चरण पादुका का है। बताया जा रहा है कि रामलला को अर्पित की गई चरण पादुका से संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन धार्मिक वस्तुओं को प्राप्त करने, सुरक्षित रखने और संरक्षित करने की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर रिकॉर्ड रखा गया था।

यदि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, तो यह समझना आवश्यक होगा कि दस्तावेजी प्रक्रिया में कमी कहां रह गई।

फिलहाल मामले में जांच जारी है और एसआईटी विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। अभी तक किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चांदी की शिलाओं, बहुमूल्य हार और अन्य भेंट वस्तुओं का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है तथा उनके संबंध में उठे सवालों का जवाब क्या है।राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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