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26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) मनाएगा। इस बार के समारोह को न केवल राष्ट्रीय उत्सव के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसका डिप्लोमैटिक और कूटनीतिक महत्व भी बहुत गहरा है। 2026 के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि (Chief Guests) के रूप में यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं — यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा — को आमंत्रित किया गया है, जो अपनी तरह का एक ऐतिहासिक कदम है।

गणतंत्र दिवस मुख्य अतिथि की परंपरा और महत्व

भारत 26 जनवरी 1950 से हर वर्ष गणतंत्र दिवस मनाता है, जब भारतीय संविधान लागू हुआ था और देश एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ। समारोह के दौरान आमतौर पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री या उच्चस्तरीय प्रतिनिधि को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलती है और भारत की विदेश नीति के प्राथमिक लक्ष्यों को वैश्विक स्तर पर अभिव्यक्ति मिलती है।

पिछले 11 सालों में कौन-कौन से विदेशी मेहमान चीफ गेस्ट बने?


2016 में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद।
2017 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान।
2018 में आसियान देशों के प्रमुख- 10 मेहमान।
2019 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा।
2020 में ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो।
2023 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी।
2024 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों।
2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो।
2026 में यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन।

ईस खास मौके पर हम आपको बता दें कि, यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व टीम को एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। यह कदम भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों, आर्थिक साझेदारियों तथा व्यापारिक समझौतों के महत्व को दर्शाता है, खासकर उन वार्ताओं के बीच जो भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ा रहे हैं।

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