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समाचार मिर्ची

ढाका। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई के लिए मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। यह फैसला अनुपस्थिति में सुनाया गया, क्योंकि हसीना अगस्त 2024 में देश छोड़कर भारत चली गई थीं।

ट्रिब्यूनल के तीन सदस्यीय पैनल ने हसीना को विद्रोह दबाने के लिए सुरक्षाबलों को हत्या, फांसी और घातक हथियारों का इस्तेमाल करने का आदेश देने का दोषी पाया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 के प्रदर्शनों में करीब 1,400 लोग मारे गए थे। इस मामले में हसीना के पूर्व गृह मंत्री आसदुज्जमां खान कमाल को भी मौत की सजा दी गई है।

फैसले से पहले ढाका और देश के अन्य हिस्सों में तनाव चरम पर था। अवामी लीग के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें कच्चे बम विस्फोट और बसों में आगजनी की घटनाएं हुईं। अंतरिम सरकार ने सुरक्षा बढ़ा दी है और ‘शूट-ऐट-साइट’ के आदेश जारी किए हैं। हसीना के बेटे साजीब वाजेद ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में चेतावनी दी थी कि अगर उनकी पार्टी पर प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो फरवरी 2026 के चुनावों को बाधित किया जा सकता है।

हसीना के समर्थक इस मुकदमे को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हैं, जबकि अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने कहा कि ट्रायल पारदर्शी था। यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

कहां हैं शेख हसीना?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना वर्तमान में भारत में निर्वासन (एक्जाइल) में रह रही हैं। अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के दौरान सत्ता से हटने के बाद उन्होंने ढाका छोड़ दिया था और तब से भारत में ही ठहरने का फैसला किया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वे दिल्ली या उसके आसपास के किसी अज्ञात स्थान पर हैं, जहां से वे अवामी लीग के नेताओं के संपर्क में बनी हुई हैं।

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