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दिल्ली। झारखंड की राजनीति और सामाजिक चेतना को गहराई से प्रभावित करने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को 81 वर्ष की आयु में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी और ब्रेन स्ट्रोक से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। झारखंड के आदिवासी समाज के लिए वे न केवल एक नेता बल्कि संघर्ष और उम्मीद का प्रतीक थे।

शिबू सोरेन के निधन की जानकारी खुद उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने लिखा कि .. “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं।”

वह लंबे समय से किडनी की बीमारी और ब्रेन स्ट्रोक से जूझ रहे थे। शिबू सोरेन ने अपने जीवन में आदिवासियों के अधिकारों, जंगल-जमीन की रक्षा और झारखंड राज्य के निर्माण के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उनके निधन की खबर ने पूरे झारखंड में शोक की लहर है।

झारखंड राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान

झारखंड का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ, लेकिन इस सपने की नींव दशकों पहले पड़ी थी। इस संघर्ष की अगुवाई करने वालों में शिबू सोरेन का नाम सबसे प्रमुख है। उन्होंने जंगल-जमीन-जाहिरात (तीन जे) आंदोलन को गति दी और आदिवासी समाज को यह एहसास कराया कि उनकी पहचान, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा के लिए एक अलग राज्य जरूरी है।

बता दें कि, शिबू सोरेन ने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री का पद संभाला। हालांकि उनके कार्यकाल कई बार राजनीतिक अस्थिरता के चलते छोटे रहे, लेकिन उन्होंने हमेशा जनता से जुड़ाव बनाए रखा। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने आदिवासी कल्याण, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी।

सूत्रों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर जल्द ही रांची लाया जाएगा, जहां राज्य सरकार की ओर से राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचने की उम्मीद है।

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