नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस डील पर साइन होने के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खोलने और व्यापार शुरू करने का ऐलान किया गया है। इससे भारत को तेल आपूर्ति, माल ढुलाई लागत और महंगाई के दबाव में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस कड़ी में यहां बता दें कि, होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है, जिससे दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है। खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देश जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर के लिए यह मुख्य निर्यात मार्ग है। ये सभी देश भारत को ऊर्जा सप्लाई करने वाले महत्वपूर्ण स्रोत हैं। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण इस स्ट्रेट में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित हुई थी।
जानकारी दे दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट में बिना रोक-टोक जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकेगी और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटा दी गई है। उनके ऐलान के बाद रविवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत चार प्रतिशत घटकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल रह गई। इससे पहले युद्ध की वजह से कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
उद्योग सूत्रों और विश्लेषकों के अनुसार, स्ट्रेट के फिर से खुलने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को फायदा होगा। इससे पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में कमी की संभावना बढ़ गई है।
