कोलकाता। 13 फरवरी 2026। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और विवादास्पद मोड़ आ गया है। पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर (बेलदांगा) में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति जैसी मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। 11 फरवरी 2026 को हजारों समर्थकों और धार्मिक नेताओं की मौजूदगी में पहली ईंट रखी गई, जिसे ‘मिशन बाबरी’ का हिस्सा बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कड़ी चेतावनी के बावजूद यह काम जारी है, और इससे राज्य में सियासी तापमान बढ़ गया है।
इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, यह घटनाक्रम 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहा है, जब पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक पर सबकी नजर है। हुमायूं कबीर, जो टीएमसी से निलंबित होने के बाद जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के अध्यक्ष बने हैं, ने इस प्रोजेक्ट को अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र बना लिया है। उन्होंने दावा किया है कि यह मस्जिद हूबहू अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसी होगी, जिसमें 10,000 से अधिक लोग एक साथ नमाज अदा कर सकेंगे। निर्माण में लगभग 50 से 55 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।
याद दिला दे कि, यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था, जब 6 दिसंबर को (बाबरी विध्वंस की 33वीं वर्षगांठ पर) नींव रखी गई थी। उसके बाद कबीर ने टीएमसी से अलग होकर जनता उन्नयन पार्टी बनाई। रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्जिद निर्माण के लिए फंडिंग विभिन्न क्षेत्रों से आई है, जिसमें बांग्लादेश और मध्य पूर्व के स्रोत शामिल हैं। भूमि करीब 7 से 11 एकड़ बताई जा रही है, और स्थानीय स्तर पर इसे ‘बाबरी मस्जिद मैदान’ कहा जा रहा है।
वही, बीजेपी ने इसे ममता सरकार की तुष्टीकरण नीति का परिणाम बताया है। पार्टी का कहना है कि टीएमसी का निलंबन महज दिखावा है, और असल में यह मुस्लिम वोटों को मजबूत करने की साजिश है। योगी आदित्यनाथ के बयान ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया, जहां उन्होंने कहा कि बाबरी संरचना कभी नहीं बनेगी और ऐसे सपने देखने वालों को कयामत का इंतजार करना पड़ेगा, जो कभी नहीं आएगा। उत्तर प्रदेश से कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों ने ‘चलो मुर्शिदाबाद यात्रा’ की घोषणा भी की, लेकिन पुलिस ने रोक लगाई।
टीएमसी ने खुद को इससे अलग किया है। पार्टी का कहना है कि यह कबीर का व्यक्तिगत एजेंडा है और सस्ता ड्रामा है। ममता बनर्जी ने ऐसे मुद्दों पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन विपक्ष इसे उनके शासन की कमजोरी बता रहा है। स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि निर्माण जारी है और कोई बड़ी रोक-टोक नहीं दिख रही।
चलते चलते बता दें कि, पश्चिम बंगाल में 2026 का चुनाव पहले से ही रोचक होने वाला था, लेकिन इस ‘बाबरी मस्जिद’ प्रोजेक्ट ने इसे और धारदार बना दिया है। क्या यह मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित कर पाएगा? क्या टीएमसी का वोट बैंक बंटेगा? या बीजेपी को फायदा होगा? ये सवाल समय के साथ जवाब मिलेंगे। फिलहाल, मुर्शिदाबाद में निर्माण जारी है और राजनीतिक बहस गरम है।
