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समाचार मिर्ची

जम्मू-कश्मीर।जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि बीजेपी के सदस्यों ने माफी की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

इस संबंध में बीजेपी विधायक शाम लाल शर्मा ने सदन में स्पष्ट कहा कि या तो लीडर ऑफ द हाउस स्वयं माफी मांगें या फिर मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में स्पीकर की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाए। उनका तर्क था कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और यदि कोई बयान विवाद पैदा करता है तो उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।

बीजेपी के अन्य विधायकों ने भी इस मांग का समर्थन किया और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। विपक्ष का आरोप था कि संबंधित बयान से सदन की मर्यादा प्रभावित हुई है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने बीजेपी विधायकों को मनाने की कोशिश की कि वे क्वेश्चन आवर चलने दें और जब लीडर ऑफ द हाउस फ्लोर पर हों तो इस मुद्दे को उठाएं। हेल्थ मिनिस्टर सकीना इटू ने भी बीजेपी सदस्यों पर असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, खासकर डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुरिंदर चौधरी के खिलाफ।

बढ़ता तनाव और वॉकआउट

हालांकि स्पीकर और मंत्रियों की अपील के बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। बीजेपी विधायक अपनी मांग पर अड़े रहे और उन्होंने कहा कि जब तक माफी या स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता, वे सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे।आखिरकार, विरोध के प्रतीक के रूप में बीजेपी विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। उनके बाहर जाने के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री या लीडर ऑफ द हाउस इस मुद्दे पर कोई औपचारिक बयान जारी करेंगे। यदि ऐसा होता है तो विवाद शांत हो सकता है, अन्यथा आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।फिलहाल, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हुआ यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक नए विवाद के रूप में दर्ज हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी सत्रों में सदन का माहौल चुनौतीपूर्ण रह सकता है।

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