कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। चुनाव आयोग ने राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) 2026 की प्रक्रिया के लिए संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) पश्चिम बंगाल ने मंगलवार को यह जानकारी साझा की कि राज्य की अंतिम मतदाता सूची अब 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इससे पहले यह तारीख 14 फरवरी निर्धारित थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 9 फरवरी 2026 के निर्देश और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से विस्तार के अनुरोध के बाद चुनाव आयोग ने इसे दो सप्ताह बढ़ा दिया।
जानकारी दे दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए थे कि एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा नहीं बर्दाश्त की जाएगी, लेकिन दस्तावेजों की जांच और स्क्रूटनी में अधिक समय लगने की संभावना को देखते हुए कम से कम एक सप्ताह का विस्तार दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि प्रभावित मतदाताओं द्वारा जमा दस्तावेजों की जांच में देरी हो सकती है, इसलिए इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) और असिस्टेंट ईआरओ को अतिरिक्त समय दिया जाए। इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने 10 फरवरी को पश्चिम बंगाल के सीईओ को पत्र लिखा और नया शेड्यूल जारी किया।
इस दौरान यह भी बताते चले कि, एसआईआर प्रक्रिया में ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं। योग्यता प्रमाणित करने के लिए आधार, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज मांगे जाते हैं। यदि कोई संदेह होता है तो नोटिस जारी किया जाता है, जिस पर सुनवाई और अपील का प्रावधान है। चुनाव आयोग का कहना है कि इस व्यायाम से मतदाता सूची में पारदर्शिता आएगी और लोकतंत्र मजबूत होगा। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए विरोध किया है, उनका आरोप है कि इससे लाखों वैध मतदाताओं के नाम कट सकते हैं।
वही, एसआईआर प्रक्रिया में ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं। योग्यता प्रमाणित करने के लिए आधार, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज मांगे जाते हैं। यदि कोई संदेह होता है तो नोटिस जारी किया जाता है, जिस पर सुनवाई और अपील का प्रावधान है। चुनाव आयोग का कहना है कि इस व्यायाम से मतदाता सूची में पारदर्शिता आएगी और लोकतंत्र मजबूत होगा। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए विरोध किया है, उनका आरोप है कि इससे लाखों वैध मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। कुल मिलाकर, एसआईआर 2026 पश्चिम बंगाल में स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के समन्वय से यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो रही है, जो भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
