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समाचार मिर्ची

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा का क्रूर सिलसिला एक बार फिर तेज हो गया है। 5 जनवरी 2026 को मात्र 24 घंटे के भीतर दो हिंदू व्यक्तियों की क्रूर हत्याएं हुईं, जिसने पूरे देश में दहशत फैला दी है। यह घटनाएं पिछले 18 दिनों में हिंदू समुदाय पर हो रही छठी घातक हमले की कड़ी हैं। इन हमलों ने न केवल स्थानीय हिंदू परिवारों को भयभीत किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अंतरिम सरकार के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है, जिससे अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं।

इससे कुछ घंटे पहले ही जशोर जिले के मोनिरामपुर उपजिला के कपालिया बाजार में 45 वर्षीय (कुछ रिपोर्टों में 38 वर्ष) हिंदू व्यापारी और पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। राणा एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे और ‘दैनिक बीडी खबर’ अखबार के कार्यवाहक संपादक भी थे। अज्ञात हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर फैक्ट्री पहुंचे, उन्हें बाहर बुलाया और गली में ले जाकर सिर में गोली मार दी। कुछ रिपोर्टों में गले पर भी वार की बात कही गई है।

बता दें कि, ये दो हत्याएं पिछले कुछ हफ्तों में हिंदू समुदाय पर हो रही लगातार हिंसा की ताजा कड़ी हैं। 3 जनवरी को 50 वर्षीय खोकन चंद्र दास की बेरहमी से हत्या हुई, जिन्हें हमलावरों ने काटा-पीटा और आग लगा दी। वे शरियतपुर जिले के दामुद्या में दवा की दुकान चलाते थे। 24 दिसंबर को राजबाड़ी के पांग्शा उपजिला में अमृत मंडल को कथित उगाही के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया। इससे पहले 18 दिसंबर को मैमनसिंह में 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीटकर मार डाला और शव को आग लगा दी।

बताते चले कि, ये घटनाएं बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती हैं। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बांग्लादेश में हिंदू आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 8% है, लेकिन राजनीतिक उथल-पुथल में वे बार-बार निशाना बनते हैं। यह स्थिति न केवल मानवीय संकट है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी खतरा है।

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