दिल्ली। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन से केरल के एर्नाकुलम जा रही मंगला एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12618) में शुक्रवार देर रात करीब 30 स्कूली बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। खाना खाने के कुछ देर बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हुई। इनमें से पांच बच्चों की हालत गंभीर हो गई।यह सभी छात्र त्रिचूर के हैप्पी कॉन्वेंट स्कूल के थे, जो दिल्ली में शैक्षणिक भ्रमण के बाद वापस लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि बच्चों ने दोपहर में ट्रेन की पैंट्रीकार से खाना खाया था। खाना खाने के करीब चार घंटे बाद उन्हें लक्षण दिखने लगे। इसके बाद शुक्रवार रात करीब 9:02 बजे बच्चों के उपचार के लिए ट्रेन को खंडवा स्टेशन पर रोका गया।
जानकारी दे दें कि, खंडवा स्टेशन पर ट्रेन को करीब 50 मिनट के लिए रोका गया। रेलवे और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने बच्चों को प्राथमिक उपचार कर दवाएं दीं। खंडवा सीएमएचओ डॉ. ओपी जुगतावत ने बताया कि आशंका है कि पैंट्रीकार के भोजन से हुई फूड पॉइजनिंग की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी थी।जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल ने बताया कि सूचना मिलते ही बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेलवे चिकित्सकों की निगरानी में आगे भेज दिया गया। रेलवे स्टेशन मैनेजर जीएल मीणा ने बताया कि रेलवे के डॉक्टर सुभाष पाटिल बच्चों के साथ भुसावल तक गए। वहां तक सभी बच्चों की हालत में सुधार रहा, इसलिए किसी को उतारकर इलाज कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत के बाद बढ़ी चिंता
ट्रेन में यात्रा कर रहे बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद उनके साथ मौजूद लोगों और रेलवे कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ गई। बताया गया कि करीब 30 बच्चों को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हुई। इनमें से पांच बच्चों की हालत गंभीर होने की सूचना के बाद चिकित्सा सहायता की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो गई।
यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों के एक साथ बीमार पड़ने के कारण स्वास्थ्य विभाग और रेलवे की मेडिकल टीम ने मामले को गंभीरता से लिया। खंडवा स्टेशन पर ट्रेन पहुंचते ही बच्चों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और जरूरत के अनुसार दवाएं दी गईं।
प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति में सुधार
मंगला एक्सप्रेस में करीब 30 छात्रों की अचानक तबीयत बिगड़ने की घटना ने शुक्रवार रात रेलवे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया था। उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षणों के कारण बच्चों को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ी।
खंडवा स्टेशन पर ट्रेन रोकने के बाद डॉक्टरों की टीम ने बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। प्राथमिक उपचार और दवाएं देने के बाद उन्हें रेलवे चिकित्सकों की निगरानी में आगे की यात्रा जारी रखने की अनुमति दी गई।
आखिर में बता दें कि, रेलवे स्टेशन मैनेजर के अनुसार, भुसावल तक बच्चों की हालत में सुधार बना रहा और किसी को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। फिलहाल मामले में पैंट्रीकार के भोजन से फूड पॉइजनिंग की आशंका पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।मंगला एक्सप्रेस की इस घटना में रेलवे और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई से प्रभावित छात्रों को समय पर उपचार मिल सका। अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिक चिकित्सा के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार होने से यात्रा को आगे जारी रखा गया।
