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मुंबई की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। 20 साल की राजनीतिक दुश्मनी के बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने एक मंच पर आकर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव 2026 के लिए संयुक्त घोषणापत्र ‘वचन नामा’ जारी किया। यह घोषणापत्र शिवसेना भवन में जारी किया गया, जहां राज ठाकरे 20 साल बाद पहुंचे और भावुक होकर बोले, “ऐसा लग रहा है जैसे जेल से बाहर आया हूं।

बता दें कि, उद्धव ठाकरे ने इसे और गंभीर बनाते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र ने ले ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले वोटों की चोरी हुई और अब उम्मीदवारों की चोरी हो रही है। उद्धव ने मांग की कि जिन 68 वार्डों में महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं, वहां चुनाव रद्द कर दोबारा मतदान कराया जाए। उन्होंने कहा कि निर्विरोध जीत से युवा मतदाताओं (खासकर जेन जेड) को वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है। उद्धव ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर पर भी तीखा हमला बोला।

हालांकि, राहुल नरवेकर ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे नामांकन केंद्र में नहीं थे और फुटेज में उनकी मौजूदगी का कोई सवाल ही नहीं उठता। राज्य चुनाव आयोग ने भी निर्विरोध जीत के मामलों की जांच का आदेश दिया है और दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती के बारे में रिपोर्ट मांगी है।

गौरतलब हैं कि, यह चुनाव ठाकरे ब्रांड की अग्निपरीक्षा है। 2017 में शिवसेना ने बीएमसी में बहुमत हासिल किया था, लेकिन अब विभाजन के बाद स्थिति बदल गई है। उद्धव और राज की एकजुटता से विपक्ष मजबूत हुआ है, जबकि महायुति सत्ता का फायदा उठा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्म होगा। मुंबईकर तय करेंगे कि शहर की सल्तनत किसके हाथ में रहेगी।

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