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नई दिल्ली: खेती के टिप्स: सब्जी बोने से पहले खेत में ढैंचा या सनई जैसी हरी खाद के बीज डालना एक प्राकृतिक तरीका है, जो केमिकल खादों का खर्चा आधा कर देता है। इससे सब्जियों की पैदावार और मुनाफा सीधे दोगुना हो जाता है।हर किसान खेती से अधिक मुनाफा कमाना चाहता है, लेकिन कई किसान अभी भी पुरानी तरकीबों पर निर्भर हैं, जो अब घाटे का सौदा साबित हो रही हैं। अगर आप अगली सब्जी की फसल से दोगुनी कमाई चाहते हैं, तो बुवाई से ठीक पहले खेत में ढैंचा या सनई के बीज छिड़क दें। इससे जमीन की ताकत बढ़ती है और पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

सब्जी की बुवाई से कुछ हफ्ते पहले इन बीजों को खेत में बिखेरने पर पौधे हवा से नाइट्रोजन खींचकर मिट्टी में लॉक करते हैं। जब ये पौधे घुटनों तक ऊंचे हो जाते हैं, तो उन्हें ट्रैक्टर से मिट्टी में पलट दें। यह हरी खाद मिट्टी में घुलकर कड़ापन खत्म कर देती है और मिट्टी को भुरभुरी बना देती है।इस प्रक्रिया से सब्जियों की जड़ें मजबूत होती हैं और मिट्टी का पानी सोखने व रोकने का क्षमता कई गुना बढ़ जाता है, जिससे सूखे में भी फसल हरी-भरी रहती है। इससे केमिकल खाद और कीटनाशकों का खर्च आधा हो जाता है, क्योंकि मिट्टी को ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन और सूक्ष्म पोषक तत्व मिल जाते हैं। नतीजतन, सब्जियों की गुणवत्ता बढ़ती है, पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती है और शुद्ध मुनाफा दोगुना हो जाता है।

क्या है हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग)?

हरित खाद ऐसी फसल होती है जिसे मुख्य फसल लेने से पहले केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से उगाया जाता है। ढैंचा और सनई इसके सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं। ये दलहनी वर्ग की फसलें हैं, जिनकी जड़ों में मौजूद सूक्ष्म जीव वायुमंडल की नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने में मदद करते हैं।

जब इन पौधों को बढ़ने के बाद खेत में ही जोतकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, तो वे धीरे-धीरे सड़कर प्राकृतिक खाद का रूप ले लेते हैं। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ (ऑर्गेनिक मैटर) बढ़ता है और भूमि अधिक उपजाऊ बनती है।

मिट्टी की सेहत में होता है सुधार

हरित खाद का सबसे बड़ा लाभ मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार के रूप में देखा जाता है। ढैंचा और सनई के पौधे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे मिट्टी का कड़ापन कम होता है और वह अधिक मुलायम एवं भुरभुरी बनती है।

भुरभुरी मिट्टी में सब्जियों की जड़ें आसानी से फैलती हैं, जिससे पौधों को पोषक तत्व और पानी बेहतर तरीके से मिल पाता है। मजबूत जड़ प्रणाली पौधों की वृद्धि को भी बेहतर बनाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हरित खाद को प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। किसानों को अपनी भूमि का समय-समय पर मिट्टी परीक्षण कराना चाहिए और उसी के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करना चाहिए। ढैंचा और सनई जैसी हरित खाद का उपयोग अन्य वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के साथ मिलाकर करने से लंबे समय तक मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

बढ़ती खेती लागत के दौर में यह तकनीक किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प बन सकती है। इससे मिट्टी की सेहत में सुधार, जैविक पदार्थ की वृद्धि और बेहतर फसल प्रबंधन में सहायता मिलती है, जिससे लंबे समय में खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है।

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