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लखनऊ, खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अब छोटे-छोटे किसानों के लिए भी संभव हो रहा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के एक किसान राजेश कुमार ने गाजर की धुलाई के लिए मैकेनिकल गाजर धुलाई मशीन (Carrot Washing Machine) का इस्तेमाल शुरू किया है।

यह मशीन मैकेनिकल गाजर धुलाई मशीन है, जिसमें घूर्णन ड्रम (Rotary Drum) या ब्रश सिस्टम लगा होता है। गाजरों को ड्रम में डालने पर पानी का तेज प्रवाह और रबर या नायलॉन ब्रश की मदद से मिट्टी, कीचड़ और अशुद्धियां पूरी तरह हट जाती हैं। मशीन पानी का पुनर्चक्रण (Recycling) करती है, जिससे पानी की बचत होती है और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचता है।

बता दें कि, भारत में गाजर की खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में होती है। गाजर एक जड़ वाली सब्जी है, जो मिट्टी में उगती है, इसलिए कटाई के बाद सफाई जरूरी है। बिना अच्छी सफाई के गाजर बाजार में कम भाव पर बिकती है, क्योंकि ग्राहक चमकदार और साफ उत्पाद पसंद करते हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में पहले से ही ऐसी मशीनें नहर किनारे लगी हुई हैं, जहां दिन में 60-70 क्विंटल गाजर धोई जाती है।

जानकारी दे दें कि, इस मशीन की क्षमता अलग-अलग मॉडल पर निर्भर करती है। छोटी मशीनें 200-500 किलोग्राम प्रति घंटा धो सकती हैं, जबकि बड़ी मशीनें 40-50 क्विंटल तक। यह गाजर के अलावा अदरक, हल्दी, चुकंदर और अन्य जड़ वाली फसलों की धुलाई के लिए भी उपयुक्त है। ब्रश और पानी के संयोजन से माइक्रोबियल लोड कम होता है, जिससे उत्पाद लंबे समय तक ताजा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीक से किसान बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रह सकते हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि 2025-26 में सभी जिलों में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आवेदन आसान है और सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आती है। छोटे किसान भी अब आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

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