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नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी लो-कॉस्ट एयरलाइन इंडिगो की उड़ान सेवाओं में जारी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक सप्ताह से अधिक समय से चल रही फ्लाइट रद्दीकरण की समस्या के बीच आज (9 दिसंबर) भी कंपनी ने 60 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं। इससे यात्रियों को एक बार फिर भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। एयरलाइन का दावा है कि संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है

गौरतलव हैं कि, पिछले 7 दिनों में इंडिगो ने 4500 से ज्यादा फ्लाइट्स रद की थीं। सरकार का कहना है कि अब वो इंडिगो की फ्लाइट्स में कटौती करके कुछ स्लॉट दूसरी एयरलाइंस को भी दिए जाएंगे।यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शिकायत करते हुए बताया कि उन्हें उड़ान रद्द होने की सूचना अंतिम समय पर मिल रही है, जिससे वैकल्पिक प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। कई यात्रियों ने यह भी कहा कि उन्हें रिफंड या रीबुकिंग को लेकर भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार एक्शन मोड में, स्लॉट्स में कटौती का फैसला

इंडिगो की रफ्तार पर लगातार ब्रेक लगने के बाद अब केंद्र सरकार भी सख्त मोड में नजर आ रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, एयरलाइन को संचालन सुनिश्चित करने के संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इंडिगो के गैर-जरूरी स्लॉट्स में कटौती की जाएगी और उन्हें अन्य एयरलाइंस को आवंटित किया जाएगा ताकि हवाई सेवाओं की नियमितता और यात्रियों की सुविधा प्रभावित न हो।

सरकारी सूत्रों की मानें तो यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि अन्य एयरलाइंस उन मार्गों पर उड़ानें चला सकें जहां इंडिगो असफल हो रहा है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, “हमें सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी एयरलाइन अपनी संचालन क्षमता से अधिक उड़ानें न प्लान करे। लगातार रद्दीकरण से यात्री हित प्रभावित होते हैं, जिसे सरकार हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेगी।”

एविएशन मंत्रालय द्वारा स्लॉट कटौती की कार्रवाई इंडिगो पर बड़ा दबाव बना सकती है। इससे कंपनी को अपने संचालन को पुनर्गठित करना पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि इंडिगो को जल्द से जल्द अपनी आंतरिक समस्याओं को ठीक करना होगा, क्योंकि लगातार रद्दीकरण न केवल यात्रियों के भरोसे को तोड़ता है, बल्कि एयरलाइन की प्रतिष्ठा और वित्तीय स्थिति को भी नुकसान पहुंचाता है।

बता दें कि, एविएशन मंत्रालय द्वारा स्लॉट कटौती की कार्रवाई इंडिगो पर बड़ा दबाव बना सकती है। इससे कंपनी को अपने संचालन को पुनर्गठित करना पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि इंडिगो को जल्द से जल्द अपनी आंतरिक समस्याओं को ठीक करना होगा, क्योंकि लगातार रद्दीकरण न केवल यात्रियों के भरोसे को तोड़ता है, बल्कि एयरलाइन की प्रतिष्ठा और वित्तीय स्थिति को भी नुकसान पहुंचाता है।

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