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इस्लामाबाद। धमाका दोपहर के समय हुआ, जब बड़ी संख्या में नमाजी जुमे की नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हुए थे। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, एक आत्मघाती हमलावर को इमाम बारगाह के मुख्य द्वार पर रोका गया, लेकिन वह वहीं विस्फोटक से खुद को उड़ा लेने में कामयाब हो गया। इस वजह से मुख्य प्रार्थना हॉल में प्रवेश करने से पहले ही विस्फोट हो गया, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ। यदि सुरक्षा गार्डों ने उसे रोक न लिया होता, तो मौतों की संख्या और अधिक हो सकती थी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार और धुआं-धुंध का माहौल बन गया, जिससे बचाव कार्यों में शुरुआती कठिनाइयां आईं।

प्रारंभिक रिपोर्ट्स में मौतों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी—कुछ जगहों पर 10-15 की मौत की खबर आई, लेकिन बाद में आधिकारिक सूत्रों ने इसे 31 तक पहुंचा दिया। घायलों की संख्या भी 160 से अधिक बताई जा रही है, जिनमें कई की हालत गंभीर है। घायलों को तुरंत पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस), पॉलिक्लिनिक अस्पताल और सीडीए अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई और कई घायलों को रावलपिंडी के अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया क्योंकि पीआईएमएस की क्षमता भर चुकी थी। बचाव दल, पुलिस, रेंजर्स और पाकिस्तान आर्मी के जवान मौके पर पहुंचे और इलाके को सील कर दिया। फोरेंसिक टीमों ने सबूत जुटाने का काम शुरू कर दिया है।

इस संबंध में हम आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले की कड़ी निंदा की और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कायरतापूर्ण हमलों से पाकिस्तान नहीं झुकेगा और दोषियों को सजा दी जाएगी। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी हमले को अमानवीय करार दिया। इस्लामाबाद पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। कुछ पुलिस सूत्रों ने हमलावर को विदेशी नागरिक बताया है और इसे फितना अल-ख्वारजी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी से जुड़े चरमपंथी तत्व) से जोड़ा है। हालांकि, यह आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह हमला किसी बड़े संगठन की साजिश का हिस्सा था या अलग-थलग घटना।

यहां हम आपको बताते चले कि, यह घटना उस समय हुई है जब पाकिस्तान में राजनीतिक और आर्थिक संकट जारी है। सुरक्षा बलों पर पहले से ही दबाव है और ऐसे हमले सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। शिया समुदाय के नेताओं ने सरकार से बेहतर सुरक्षा की मांग की है और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन की आशंका जताई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा हो रही है, क्योंकि यह धार्मिक स्थलों पर हमलों की वैश्विक समस्या को उजागर करता है।

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