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नई दिल्ली।बारिश के मौसम में ककोड़ा की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकती है। यह फसल 60-70 दिनों में तैयार होती है और बाजार में अच्छे दाम पर बिकती है।मानसून के समय कई सब्जियों में कीड़े लगने की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए ककोड़ा एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। यह कांटेदार और गोल-मटोल हरी सब्जी ज्यादातर जंगलों में अपने आप उग जाती है। सही तरीके से खेत में उगाने पर यह किसानों की आमदनी का अच्छा स्रोत बन सकती है।

ककोड़ा की बुवाई जून-जुलाई में मानसून की पहली बारिश के साथ की जाती है। इसके लिए 27 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श माना जाता है। गर्म और हल्की नमी वाला मौसम इस फसल के लिए उपयुक्त होता है।ककोड़ा के बीज बाजार में उपलब्ध नहीं होते और कृषि विभाग के पास भी नहीं मिलते। इसलिए किसानों को बीज जंगली इलाकों से ही जुटाने पड़ते हैं। खेत की तैयारी के लिए जैविक पदार्थों से भरपूर रेतीली मिट्टी सबसे अच्छी होती है, जिसका pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए। पौधे लगाते समय कतारों के बीच 2 से 3 मीटर और पंक्तियों के बीच 4 मीटर की दूरी रखनी चाहिए।

क्या है ककोड़ा?

ककोड़ा एक कांटेदार, गोल आकार की हरी सब्जी है, जिसे देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न स्थानीय नामों से जाना जाता है। यह प्राकृतिक रूप से जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और झाड़ियों में उगती है। इसका स्वाद अनोखा होता है और कई क्षेत्रों में इसे पौष्टिक सब्जी के रूप में काफी पसंद किया जाता है। सीमित उपलब्धता के कारण बाजार में इसकी मांग बनी रहती है और कीमत भी सामान्य सब्जियों की तुलना में अधिक मिलती है।

अब कई किसान इसे व्यावसायिक स्तर पर खेतों में उगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसकी खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बन सकती है।

मानसून में क्यों फायदेमंद है इसकी खेती?

बारिश के मौसम में टमाटर, भिंडी, बैंगन और अन्य कई सब्जियों में कीड़ों तथा फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसके मुकाबले ककोड़ा की फसल मानसूनी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करती है। यह गर्म और हल्की नमी वाले वातावरण में तेजी से बढ़ती है और उचित देखभाल के साथ अच्छा उत्पादन देती है।

किसानों के लिए यह इसलिए भी लाभकारी है क्योंकि इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम लागत आती है और उत्पादन मिलने के बाद बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना रहती है।

यदि सही तकनीक, उचित दूरी, जैविक खाद और समय पर देखभाल अपनाई जाए, तो ककोड़ा की खेती मानसून के मौसम में किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली एक प्रभावी कृषि गतिविधि बन सकती है।

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