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नई दिल्ली। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा आम बजट (2026-27) ऐसे समय पेश किया गया है जब देश के पांच प्रमुख राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—में विधानसभा चुनावों का माहौल गरम है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में यह बजट पेश किया, जिसमें कुल व्यय ₹53.47 लाख करोड़ अनुमानित है, जो पिछले संशोधित अनुमानों से 7.7% अधिक है। बजट में युवा शक्ति (युवा शक्ति) पर जोर देते हुए आर्थिक विकास, आत्मनिर्भरता, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि बड़े पैमाने पर चुनावी सौगातें नहीं दी गईं, लेकिन चुनाव वाले राज्यों को इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, खनिज, पर्यटन और कृषि क्षेत्र में लक्षित लाभ दिए गए हैं।

पश्चिम बंगाल को क्या मिला?पश्चिम बंगाल, जहां तृणमूल कांग्रेस की सरकार है और बीजेपी सत्ता हासिल करने की कोशिश में है, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर अच्छा फोकस मिला है। वित्त मंत्री ने ‘पूर्वोदय’ (Purvodaya) योजना के तहत बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में पांच एकीकृत पर्यटन स्थलों का विकास करने की घोषणा की। बंगाल में दुर्गापुर को एक प्रमुख औद्योगिक नोड के रूप में विकसित किया जाएगा, जो ‘ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ का हिस्सा होगा।एक बड़ा ऐलान दानकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर है, जो पर्यावरण-अनुकूल कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से एक वाराणसी से सिलीगुड़ी (उत्तर बंगाल) तक है, जो यात्रा समय कम करेगा और विकास को गति देगा। रेलवे में बंगाल के लिए औसत वार्षिक बजट 2009-14 के ₹4,380 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹14,205 करोड़ हो गया है, जिसमें चल रहे प्रोजेक्ट्स के लिए ₹92,974 करोड़ का निवेश है।

असम को क्या मिला?

असम, जहां बीजेपी की सरकार है, बजट में रेलवे और पर्यटन पर लाभ मिला। असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए रेलवे बजट 2009-14 के ₹2,122 करोड़ से बढ़कर ₹11,486 करोड़ हो गया है, जिसमें चल रहे प्रोजेक्ट्स के लिए ₹72,468 करोड़ हैं। बजट में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट विकास योजना शुरू की गई है, जो महायान/वज्रयान परंपराओं को बढ़ावा देगी। तेजपुर में मेंटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। असम में चाय बागान श्रमिकों के कल्याण के लिए भी कुछ प्रावधान हैं।

तमिलनाडु को विकास की सौगाततमिलनाडु, जहां डीएमके की सरकार है और अप्रैल में चुनाव होने हैं, बजट में दुर्लभ पृथ्वी (रेयर अर्थ) कॉरिडोर का बड़ा लाभ मिला। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ये कॉरिडोर खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देंगे, जो रणनीतिक खनिजों में आत्मनिर्भरता बढ़ाएंगे। हाई-स्पीड रेल में चेन्नई से हैदराबाद और बेंगलुरु कॉरिडोर शामिल हैं। पोधिगाई मलै (पश्चिमी घाट) में इको-सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल और अदिचनल्लूर (तूथुकुडी) पुरातात्विक स्थल का विकास होगा। पुलिकट झील में बर्ड वॉचिंग ट्रेल भी है। रेलवे में तमिलनाडु को रिकॉर्ड ₹7,611 करोड़ मिले हैं, जिसमें दो नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर शामिल हैं।

केरल को बजट में क्या मिला?

केरल को भी रेयर अर्थ कॉरिडोर मिला, जो खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला विस्तार करेगा। तटवर्ती क्षेत्रों में टर्टल ट्रेल्स (कछुआ घूमने के रास्ते) विकसित किए जाएंगे। हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए ₹65,000 करोड़ और रेलवे में ₹3,795 करोड़ आवंटित हैं। 16वीं वित्त आयोग की सिफारिशों से दक्षिणी राज्यों (केरल सहित) को करों में अतिरिक्त हिस्सा मिलेगा।

कुल मिला कर समग्र प्रभाव और राजनीतिक नजरियाबजट में कोई बड़ी चुनावी घोषणाएं नहीं हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास पर फोकस से इन राज्यों को लंबे समय में लाभ होगा। बीजेपी इसे “विकास का बजट” बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “चुनावी बजट” कहकर आलोचना कर रहा है। तमिलनाडु और केरल में रेयर अर्थ कॉरिडोर से औद्योगिक विकास होगा, जबकि बंगाल और असम में रेल और पर्यटन से रोजगार बढ़ेगा। कुल मिलाकर, बजट विकास-केंद्रित है और चुनावी राज्यों को संतुलित लाभ देता है।

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