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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। बारिश का मौसम पौधों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन लगातार बारिश और मिट्टी में ज्यादा नमी किचन गार्डन के कई पौधों के लिए परेशानी भी बन सकती है। तुलसी, पुदीना और करी पत्ता जैसे पौधे घरों में आसानी से उगाए जाते हैं, लेकिन मानसून में इनकी सही देखभाल नहीं की जाए तो जड़ों में पानी जमा होने, फंगल संक्रमण और पत्तियों के खराब होने की समस्या आ सकती है। अगर आपके घर की बालकनी, छत या खिड़की के पास ये पौधे लगे हैं, तो बारिश के दौरान कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर इन्हें स्वस्थ रखा जा सकता है।

यहां हम आपको यह बता दें कि, तुलसी और करी पत्ते के पौधों को लगातार तेज बारिश में छोड़ने से बचें। अगर गमले में पानी जमा हो रहा है तो उसे ऐसी जगह रखें जहां बारिश सीधे न पड़े, लेकिन पौधे को पर्याप्त रोशनी और हवा मिलती रहे। हर पौधे के लिए अच्छी जल निकासी जरूरी है। गमले में पर्याप्त ड्रेनेज होल होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। अगर गमले के नीचे प्लेट या ट्रे रखी है, तो बारिश के बाद उसमें जमा पानी निकाल दें। लगातार गीली मिट्टी जड़ों में ऑक्सीजन की कमी कर सकती है और जड़ सड़ने का खतरा बढ़ा सकती है। नमी बढ़ने के साथ पौधों में कीड़े और फंगल समस्याएं बढ़ सकती हैं। खराब या संक्रमित पत्तियों को समय-समय पर हटाना उचित होता है।

तुलसी को पर्याप्त रोशनी पसंद होती है। बारिश के दिनों में धूप कम मिलने के कारण इसकी ग्रोथ धीमी हो जाती है। इसलिए इसे ऐसी जगह रखें जहां बारिश से बचाव के साथ पर्याप्त रोशनी और हवा मिलती रहे। तुलसी की मिट्टी हमेशा गीली रखने की जरूरत नहीं होती। बारिश के कारण यदि मिट्टी पहले से नम हो तो तुलसी को अतिरिक्त पानी देने से बचें।

आखिर में बताते चले कि, पुदीना तेजी से फैलने वाला पौधा है और बारिश के मौसम में इसकी ग्रोथ और भी तेज हो जाती है। इसे नियमित रूप से काट-छांटकर आकार में रखा जा सकता है। पुदीने की पत्तियों को तोड़ते समय साफ कैंची या हाथ का इस्तेमाल करें। बहुत ज्यादा घनी शाखाएं होने पर उन्हें थोड़ा पतला करें, ताकि पौधे के अंदर तक हवा पहुंच सके। करी पत्ते का पौधा बारिश के मौसम में अच्छी ग्रोथ कर सकता है, लेकिन इसकी जड़ों के आसपास पानी जमा होने से उसे नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए गमले में अच्छी जल निकासी होना जरूरी है। अगर पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगें या मिट्टी लंबे समय तक बहुत गीली रहे, तो पानी देने की मात्रा और ड्रेनेज की जांच करें। बारिश के दौरान जरूरत से ज्यादा खाद देने से भी बचना चाहिए।

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