नई दिल्ली।6 फरवरी
नई दिल्ली। 6 फरवरी का दिन देश भर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक विशेष दिन रहा, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रिय पहल ‘परीक्षा पे चर्चा’ (Pariksha Pe Charcha) का 9वां संस्करण शुरू हो गया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने छात्रों से सीधे संवाद किया और परीक्षा के तनाव को कम करने, तैयारी की बेहतर रणनीति बनाने तथा जीवन में संतुलन बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पीएम मोदी का एक व्यक्तिगत किस्सा रहा, जिसमें उन्होंने अपनी उम्र को लेकर छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, “25 साल अभी बाकी हैं”।
हम आपको बता दें कि, कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष नए फॉर्मेट में किया गया। पीएम मोदी ने एक साथ कई स्थानों पर छात्रों से बातचीत की। दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री निवास) के अलावा गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी में भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन स्थानों पर चयनित छात्रों ने सीधे पीएम से सवाल पूछे और अपनी समस्याओं को साझा किया। यह बहु-स्थानीय प्रारूप छात्रों के साथ गहरा जुड़ाव बनाने और उनकी वास्तविक चुनौतियों को समझने का प्रयास था।
वही, पीएम मोदी ने कार्यक्रम में छात्रों को ‘एग्जाम वारियर्स’ कहकर संबोधित किया और परीक्षा को जीवन का एक हिस्सा बताते हुए तनाव मुक्त रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परीक्षा केवल अंकों की दौड़ नहीं है, बल्कि सीखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य के लिए तैयार होने का माध्यम है। छात्रों से बातचीत के दौरान पीएम ने कई व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। एक खास किस्से में उन्होंने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए छात्रों को प्रेरित किया।
इस दौरान पीएम मोदी ने छात्रों से कहा, “मैं प्रधानमंत्री बन गया हूं, फिर भी सीखना जारी है। उम्र कोई बाधा नहीं है। मेरे साथ एक किस्सा है – जब मैंने सोचा कि बहुत समय बीत गया है, लेकिन फिर लगा कि ’25 साल अभी बाकी हैं’। जीवन में हमेशा कुछ नया करने का अवसर रहता है।” यह वाक्य छात्रों के बीच खूब छाया रहा। उन्होंने छात्रों को बताया कि उम्र चाहे जितनी भी हो, सपने पूरे करने और नई शुरुआत करने की क्षमता कभी खत्म नहीं होती। यह संदेश विशेष रूप से उन छात्रों के लिए प्रेरणादायक था जो परीक्षा के दबाव में खुद को असफल महसूस करते हैं।
चलते चलते बता दें कि, पीएम ने अभिभावकों और शिक्षकों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उनका साथ दें। शिक्षकों से अपील की कि वे छात्रों में आत्मविश्वास जगाएं और सीखने को आनंददायक बनाएं। कार्यक्रम में ‘मार्क्स-मार्क्स की बीमारी’ का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि अंकों में मन को बांधने से बेहतर है कि सीखने पर फोकस करें। उन्होंने पूछा, “पिछले साल के टॉपर्स के नाम याद हैं क्या? नहीं न? तो फिर अंकों को इतना महत्व क्यों दें?”
