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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली । फसल कटाई के सीजन में जब मंडियों में माल की आवक अचानक बढ़ जाती है तो अक्सर दालों, तिलहन और दूसरी फसलों के रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से भी नीचे चले जाते हैं। ऐसे में किसानों को भारी घाटा उठाकर मजबूरी में अपनी फसल बहुत सस्ते दामों में बेचनी पड़ती है। किसानों को इस तरह की मजबूरी में बिक्री से बचाने और उनकी फसल की सही कीमत दिलाने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी पीएम-आशा योजना काम आती है।

इस कड़ी में यहां हम आपको बताते चले कि, इस योजना का मकसद है कि मंडी में रेट कितने भी गिर जाएं, लेकिन किसान को उसकी मेहनत से उगाई गई फसल का तय एमएसपी जरूर मिले। पीएम-आशा स्कीम में प्राइस सपोर्ट स्कीम का अहम काम होता है। जब मार्केट में दालों, तिलहन और सूखे नारियल के रेट एमएसपी से नीचे गिरते हैं तो सरकार नैफेड और एनसीसीएफ जैसी केंद्रीय एजेंसियों के जरिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर खुद खरीदारी शुरू कर देती है। सरकार ने दालों की पैदावार बढ़ाने के लिए अरहर, उड़द और मसूर की खरीद पर लगी 25 प्रतिशत वाली पुरानी कैप हटाकर 100 प्रतिशत खरीद की छूट दे दी है। इससे किसान अपनी पूरी फसल को सरकारी खरीद केंद्रों पर तय एमएसपी रेट पर बेच सकते हैं।

वही यह भी बता दें कि, कई बार सरकारी खरीद केंद्र दूर होते हैं या किसान खुले बाजार में ही फसल बेचना चाहता है। ऐसी स्थिति के लिए प्राइस डेफिसिएंसी पेमेंट स्कीम यानी पीडीपीएस मौजूद है, जो तिलहन किसानों के लिए उपयोगी है। इसमें किसान अपनी फसल रजिस्टर्ड मंडी में सामान्य रेट पर बेच देता है। एमएसपी और असल बिक्री मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए कर देती है। इससे किसान को बिना ज्यादा मेहनत के एमएसपी की पूरी रकम मिल जाती है।

आखिर में जानकारी दे दें कि, पीएम-आशा के तहत मार्केट इंटरवेंशन स्कीम भी शामिल है, जो जल्दी खराब होने वाली सब्जियों, फलों और गैर-एमएसपी फसलों के लिए काम करती है। जब बंपर पैदावार के कारण मंडियों में इनके रेट पिछले सीजन के मुकाबले 10 प्रतिशत से ज्यादा गिर जाते हैं तो सरकार खरीद शुरू कराती है। बिचौलियों का खेल खत्म करने के लिए ई-समृद्धि, ई-संयुक्त और राष्ट्रीय कृषि बाजार जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म जरूरी कर दिए गए हैं। आधार सत्यापन और जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड लिंक होने से भुगतान सीधे किसान के खाते में पहुंचता है। किसान नजदीकी खरीद केंद्र या पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाकर इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

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