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नई दिल्ली। राजनीतिक गलियारों में नए साल 2026 की शुरुआत एक तीखे विवाद के साथ हुई है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से कर दी, जिससे सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया। पटोले ने राहुल गांधी के अयोध्या राम मंदिर न जाने के सवाल पर सफाई देते हुए कहा कि राहुल गांधी वही कार्य कर रहे हैं जो भगवान राम करते थे।

पटोले का यह बयान कांग्रेस के लिए राहुल गांधी की छवि को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा को भगवान राम के आदर्शों से जोड़कर पेश कर रहे हैं। पटोले के अनुसार, राहुल गांधी का फोकस दिखावे पर नहीं, बल्कि शोषित-पीड़ित वर्गों के उत्थान पर है, जो राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप से मेल खाता है।

जानकारी दे दें कि,भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने इसे और गंभीर बताते हुए कहा कि नाना पटोले द्वारा राहुल गांधी की भगवान राम से तुलना करोड़ों हिंदू भक्तों की आस्था का अक्षम्य और गंभीर अपमान है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पटोले राहुल गांधी से पूछने की हिम्मत करेंगे कि उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा का मजाक क्यों उड़ाया या अब तक मंदिर क्यों नहीं गए। केसवन ने पटोले के पुराने बयानों का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राम मंदिर दर्शन के बाद ‘शुद्धिकरण’ की बात कही थी।

बता दें कि, भाजपा ने मांग की है कि कांग्रेस और नाना पटोले इस बयान के लिए माफी मांगें। वहीं, कांग्रेस इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रही है। यह विवाद दिखाता है कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग कितना संवेदनशील हो सकता है। नए साल की शुरुआत में यह घटना राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा करने वाली साबित हो सकती है।

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