नई दिल्ली। सोमवार 29 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स करीब 200 अंक गिरकर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 24,000 के स्तर पर पहुंच गया।मिडकैप और स्मॉल कैप शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। मिडकैप सूचकांक 0.34 प्रतिशत और स्मॉल कैप सूचकांक 0.55 प्रतिशत तक गिर चुके थे। सुबह 9:30 बजे तक सेंसेक्स 76,910.61 अंक पर था और निफ्टी 40 अंक की गिरावट के साथ 24,020 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी बैंक में भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई।
गिरावट की मुख्य वजहें
गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव बताया गया। शनिवार को दोनों देशों के बीच फिर से जंग शुरू होने की खबर के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.85 प्रतिशत बढ़कर 72.6 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 70.01 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।इसके अलावा एशियाई बाजारों में भी दबाव था। निक्केई 1 प्रतिशत गिरा और कोस्पी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना और ग्लोबल तनाव ने भी बाजार पर असर डाला।बीएसई के टॉप 30 शेयरों में 13 गिरावट पर रहे। कोटक महिंद्रा बैंक में 3 प्रतिशत की गिरावट हुई, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा और अडानी पोर्ट्स समेत कुछ अन्य शेयरों में 1 प्रतिशत तक की कमी आई। बाजार में कुल 124 शेयरों में लोअर सर्किट लगा।
सुबह के कारोबार में बाजार की स्थिति
सुबह करीब 9:30 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 76,910.61 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 40 अंकों की गिरावट के साथ लगभग 24,020 के स्तर पर बना हुआ था।
बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी बैंक में 200 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल छोटे शेयर ही नहीं बल्कि प्रमुख बैंकिंग कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे।
कमजोर कारोबारी माहौल का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिला। बाजार में कुल 124 शेयरों में लोअर सर्किट लगा, जो निवेशकों की सतर्कता और छोटे शेयरों में तेज बिकवाली का संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटती है, तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ वैश्विक घटनाओं पर बनी हुई है।
