नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में संशोधन किया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा के तहत आयातित कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर सफेद या रिफाइंड चीनी में परिवर्तित कर घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य कर दिया गया है।
गौरतलब है कि, इससे पहले आयातित कच्ची चीनी को उचित समय सीमा के भीतर प्रोसेस करके 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचने का प्रावधान था। अब संशोधित नियमों में प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए दो महीने की निश्चित समयसीमा तय की गई है। सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति भी दी है। साथ ही कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम निर्माताओं तथा संबंधित व्यापारियों व थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक सीमा लागू की गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो एक महीने पहले के 48.73 रुपये प्रति किलोग्राम से 29 प्रतिशत अधिक है। अधिकतम खुदरा मूल्य 75 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा के अनुसार मिल से प्राप्त चीनी की कीमतें सात से दस दिनों में 47-48 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं।
इस संबंध में इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन नीरज शिरगांवकर ने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है। कीमतों में उछाल के पीछे मौसम के कारण गन्ने की कम पैदावार, महाराष्ट्र में अधिक क्रशिंग दर, उत्तर प्रदेश में किस्मों से जुड़ी समस्याएं, त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, ब्राजील द्वारा आपूर्ति कम किए जाने के साथ जमाखोरी और सट्टेबाजी को प्रमुख कारण बताया गया है।
पहले क्या था नियम?
संशोधित व्यवस्था से पहले आयातित कच्ची चीनी को उचित समय सीमा के भीतर प्रोसेस करके घरेलू बाजार में बेचने का प्रावधान था। इसके तहत चीनी को प्रोसेस करने और घरेलू बाजार में उपलब्ध कराने की अंतिम समयसीमा 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित थी।
अब सरकार ने इस व्यवस्था को और स्पष्ट करते हुए दो महीने की निश्चित अवधि तय कर दी है। यानी आयातक केवल कच्ची चीनी को आयात करके लंबे समय तक अपने पास नहीं रख सकेंगे। उन्हें निर्धारित अवधि में इसे प्रोसेस करके सफेद या रिफाइंड चीनी के रूप में घरेलू बाजार में उतारना होगा।
कुल मिलाकर, चीनी आयात नियमों में बदलाव और स्टॉक सीमा लागू करने का फैसला सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखते हुए कीमतों में असामान्य तेजी को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयातित चीनी की उपलब्धता, घरेलू आपूर्ति और त्योहारी मांग के बीच संतुलन किस तरह बनता है और इसका खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ता है।
