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अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 7 जनवरी 2026 को एक राष्ट्रपति मेमोरेंडम जारी कर अमेरिका को 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संधियों और संस्थाओं से बाहर निकालने का आदेश दिया है। यह फैसला ट्रम्प प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है, जिसमें विदेशी संस्थाओं पर अमेरिकी करदाताओं के पैसे की बर्बादी को रोकने और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। इन 66 संगठनों में 31 संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़ी संस्थाएं और 35 गैर-UN संगठन शामिल हैं।

व्हाइट हाउस और स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, ये संगठन अमेरिकी हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं, इनमें धन की बर्बादी होती है, ये अनावश्यक हैं या खराब प्रबंधन के शिकार हैं। ट्रम्प ने 4 फरवरी 2025 को जारी एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 14199 के तहत स्टेट डिपार्टमेंट से सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों की समीक्षा कराई थी।

बता दें कि, भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण खबर इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) से अमेरिका के बाहर निकलने की है। ISA की स्थापना 2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने की थी। इसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है, जहां भारत अध्यक्ष और फ्रांस सह-अध्यक्ष हैं।

गौरतलब हैं कि, अमेरिका नवंबर 2021 में ISA का 101वां सदस्य बना था, लेकिन अब यह बाहर निकल रहा है। भारतीय अधिकारियों ने मीडिया रिपोर्ट्स पर ध्यान दिया है और कहा है कि ISA अन्य सदस्य देशों के साथ काम जारी रखेगा, खासकर विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों पर फोकस करेगा। ISA सौर ऊर्जा परियोजनाओं, फाइनेंसिंग, क्षमता निर्माण और जोखिम कम करने पर काम करेगा।

बता दें कि, यह कदम ट्रम्प की विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें बहुपक्षीयता से दूरी बनाना और अमेरिकी प्राथमिकताओं पर फोकस करना शामिल है। आने वाले दिनों में अन्य संगठनों की समीक्षा जारी रहेगी। UNFCCC से बाहर निकलने में एक साल लगेगा, लेकिन प्रभावी भागीदारी पहले ही कम हो चुकी है।यह फैसला वैश्विक जलवायु सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और बहुपक्षीयता के लिए बड़ा झटका है। भारत जैसे देश ISA को मजबूत बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे, लेकिन अमेरिका की अनुपस्थिति से वैश्विक प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

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