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अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा उलटफेर किया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पहले के व्यापक टैरिफ को अवैध घोषित करने के महज तीन घंटे बाद, ट्रम्प ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत का नया अस्थायी वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश जारी किया। यह टैरिफ 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा और यह ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत लगाया गया है। इस कदम से भारत सहित कई देशों पर पहले से लागू उच्च टैरिफ दरों में कमी आएगी, विशेष रूप से भारत के मामले में जहां पहले 18 प्रतिशत का टैरिफ था, अब वह घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा।

जानकारी केलिए बता दे कि, घटना की शुरुआत शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हुई। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। यह फैसला ट्रम्प की व्यापार नीति के लिए बड़ा झटका था, क्योंकि पिछले साल उन्होंने विभिन्न देशों से आयात पर 10 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए थे, जिन्हें राष्ट्रीय आपातकाल के आधार पर लागू किया गया था।

वही इस कड़ी में फैसले के तुरंत बाद ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने फैसले को “बहुत निराशाजनक” बताया और कहा, “मुझे अदालत के कुछ जजों पर शर्म आती है। वे हमारे देश के लिए कलंक हैं। उनमें देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।” ट्रम्प ने उन जजों को “कट्टर वामपंथियों के पालतू” करार दिया और कहा कि वे देशभक्ति नहीं दिखा रहे तथा संविधान के प्रति वफादार नहीं हैं।

इस संबंध में फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि उन्होंने ओवल ऑफिस से 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जो “लगभग तुरंत” प्रभावी होगा। व्हाइट हाउस के फैक्ट शीट के अनुसार, यह टैरिफ 24 फरवरी को सुबह 12:01 बजे से लागू होगा। यह धारा 122 के तहत अस्थायी है और अधिकतम 150 दिनों तक चल सकता है, जब तक कांग्रेस इसे बढ़ाने की मंजूरी न दे। कुछ उत्पादों जैसे ऊर्जा, दवाएं, ऑटो और एयरोस्पेस में छूट है, साथ ही यूएसएमसीए (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौता) के अनुपालन वाले देशों को भी कुछ राहत मिलेगी।

चलते चलते बता दें कि, यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है, क्योंकि आयात महंगा होने से उपभोक्ता कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि ट्रम्प इसे अमेरिकी उद्योगों को मजबूत बनाने का तरीका बता रहे हैं। भारत जैसे निर्यातक देशों के लिए यह मिश्रित प्रभाव वाला है – एक तरफ टैरिफ कम होना फायदेमंद, लेकिन वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका चिंता का विषय है।

कुल मिलाकर ट्रम्प की यह रणनीति उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है, जो पिछले कार्यकाल से चली आ रही है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला राष्ट्रपति की शक्तियों पर अंकुश लगाने वाला महत्वपूर्ण है, लेकिन ट्रम्प ने वैकल्पिक कानूनी रास्ते से इसे बेअसर करने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि 150 दिनों के बाद टैरिफ बढ़ाने के लिए विधायी मंजूरी जरूरी होगी।

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